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विकास की और बढ़ता हमारा देश...

विकास की और बढ़ता देश...

देखो अंग्रेंजो जिसे तुम सांप सपेरों का देश समझते थे ,अब कितना विकसित हो गया है हमारा चमड़ा उद्योग कितना फल फूल रहा है जिसे तुम भारतीय नारी कहते थे जो रसोई में और घूँघट में रहती थी अब वो रसोई में नहीं बल्कि ऑफिस जाती है दारू सिगरेट और अब एक्सपोज़ करती है, बेटी अपने माता पिता को और पत्नी अपने पति को ।पति अपनी पत्नी को धोखा देता है

भारत के लोग अपने देश वीर महापुरषो को नहीं जानते

बल्कि हिटमैन सुपरमैन और स्पाइडर मैन को जानते है

दूध घी मक्खन खाने वाला देश आज पिज़्ज़ा बॉर्गर और मेदे की बनी चीज़े खा रहा है

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अनमोल उपहार है मनुष्य जीवन

अनमोल उपहार

जीवन परमात्मा का अनमोल उपहार है। यह स्वयं ही इतना दिव्य, पवित्र और परिपूर्ण है कि संसार का कोई भी अभाव इसकी पूर्णता को खंडित करने में असमर्थ है। आवश्यकता यह है कि हम अपने मन की गहराई से अध्ययन कर उसे उत्कृष्टता की दिशा में उन्मुख करें।

ईर्ष्या, द्वेष, लोभ एवं अहम के दोषों से मन को विकृत करने के बजाए अपनी जीवनशैली को बदल कर सेवा, सहकार, सौहार्द जैसे गुणों के सहारे मानसिक रोगों से बचा जा सकता है और मानसिक क्षमताओं को विकसित किया जा सकता है।

इसीलिए कहा जाता है कि मनुष्य जीवन चार तरह की विशेषताएं लिए रहता है।

इस संबंध में एक श्लोक प्रस्तुत है -

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400 ग्राम गोमूत्र की बैटरी से 3 वाट का बल्ब 400 घंटे तक जलाया जा सकता है।

400 ग्राम गोमूत्र की बैटरी से 3 वाट का बल्ब 400 घंटे तक जलाया जा सकता है।

400 ग्राम गोमूत्र की बैटरी से 3 वाट का बल्ब 400
घंटे तक जलाया जा सकता है। 12 बोल्ट की इस ‘गो-
ज्योति बैटरी’ से मोबाइल भी चार्ज हो सकता है। इसे
कानपुर (उत्तरप्रदेश) की गौशाला में बनाया गया है।
इसे बिजली से चार्ज करने की जरूरत भी नहीं होती।
कानपुर गोशाला के महामंत्री पुरूषोत्तम तोषनीवाल के
प्रयासों से यह सब संभव हुआ है। तोषनीवाल के
अनुसार यह बिजली का वैकल्पिक साधन बन
सकती है।
तोषनीवाल ने दावा... किया कि बिजली से चार्ज
होने वाली बैटरियां 5-6 घंटे तक ही काम करती हैं,
जबकि गौ-ज्योति बैटरी 400 ग्राम गो-मूत्र से 400

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वेद सार्वभौमिक मानव धर्म के अधिकारिक प्रतिनिधि व आदिस्रोत’

वेद सार्वभौमिक मानव धर्म के अधिकारिक प्रतिनिधि व आदिस्रोत’

संसार के सभी मनुष्यों वा स्त्री-पुरुषों पर ध्यान केन्द्रित करें तो यह सभी एक बहुत ही बुद्धिमान व सर्वव्यापी कलाकार की रचनायें अनुभव होती हैं। संसार भर में सभी मनुष्य की दो आंखे, दो कान, नाक, मुंह, गला, शिर, वक्ष, उदर, कटि व पैर प्रायः एक समान ही हैं। सभी मनुष्यों का कर्तव्य है कि वह अपने बनाने वाले को जाने, उसका धन्यवाद करें, उससे कृतज्ञ एवं अनुग्रहीत हों। यही मनुष्यता वा मानवधर्म का आधार व मुख्य सिद्धान्त है। आज का मनुष्य अनेक प्रकार के ज्ञान से सम्पन्न है। विज्ञान तो अपनी चरम अवस्था पर आ पहुंच है परन्तु यदि धार्मिक व सामाजिक ज्ञान की बात करें तो आज भी संसार में इस क्षेत्र में अधिकांशतः कृ

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