गाय और आस्था

बिना गाय के मानव का भविष्य धूमिल है

गाय , मानव , धूमिल , बचाओ

किसी छोटे से छोटे कार्यक्रम का आयोजन भी बिना उसकी योजना के अपूर्ण ही रहता है। यदि कार्यक्रम की पूर्ण रूपरेखा बना ली गयी है और उसके एक-एक पहलू पर पूर्ण चिंतन-मनन कर लिया गया है तो फिर उसके संपन्न होने में किसी प्रकार की बाधा नही आ सकती। पूर्ण मनोयोग से किये गये कार्य को मिलने वाली असफलता भी कुछ शिक्षा देकर जाती है और उससे व्यक्ति निराश न होकर द्विगुणित ऊर्जा से भरकर पुन: प्रयास करता है और एक दिन सफल हो जाता है। किसी कवि ने कितना सुंदर कहा है :-

परम पूज्य व पाप हारिणी गौ गंगा और गीता हैं

परम पूज्य व पाप हारिणी गौ गंगा और गीता हैं

इस हिन्दोस्तां के माटी की महिमा अपरम्पार है
गौ गंगा गीता से निर्मित इसका श्यामल सार है

परम पूज्य व पाप हारिणी गौ गंगा और गीता हैं
तरण तारिणी मोक्ष दायिनी तीनो परम पुनीता हैं

रोम रोम में देव रमे हों ऐसी पवित्र गौ माता है
चार धाम का पुण्य भी गौ सेवा से मिल जाता है

जो जन इसकी सेवा करते भव सागर तर जाते हैं
वेद पुराण उपनिषद भी इसकी महिमा बतलाते हैं

सकल पदारथ दूध दही घी औषधि गुणकारक हैं
स्वस्थ प्रदायक मंगलकारक समूल रोग निवारक हैं

भगवान कृष्ण ग्वालों संग खुद भी गायें चराते थे
बछड़ों के संग क्रीड़ा करते दूध दही घी खाते थे

दूध से करें ये छोटे से उपाय, घर में होगा लक्ष्मी का स्थाई वास

हिंदू धर्म में चंद्रमा को भगवान के रुप में माना जाता है। माना जाता है कि अगर आपको चंद्रमा खराब है, तो उपाय करने से आपके ऊपर उनकी दया जरुर बनती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार माना जाता है कि दूध चंद्रमा का कारक है। जिस तरह शिवलिंग में दूध अर्पित करने से सभी ग्रहों का अशुभ फल खत्म हो जाता है। वहीं राहु के बुरे प्रभाव को खत्म करने के लिए सांप को दूध पिलाना अच्छा माना जाता है। इसी तरह कई उपाय है। जिन्हें थोड़े से दूध के द्वारा करने पर आपको धन-धान्य, बल-बुद्धि की प्राप्ति होगी। हर काम में सफलता भी प्राप्त होगी। इतना ही नहीं दूध का कई उपाय करने से आपके घर लक्ष्मी का वास भी हो जाता है। ये भी पढ़े-

सात्विक जीवन

सात्विक जीव

किसी व्यक्ति या प्राणी को तभी सात्विक कहा जा सकता है जब उस प्राणी की प्रवृत्ति मुख्यतः सात्विक हो. "सात्विक" नाम का अर्थ दैवीय, शुद्ध और आध्यात्मिक लोगों से है।

सत्त्व मन की एक अवस्था है जिसमें मन स्थिर, शांत और शांतिपूर्ण होता है।

हिन्दू दर्शन में, सत्त्व ,सांख्य दर्शन में वर्णित तीन गुणों में से एक है। अन्य दो गुण हैं - रजस् और तमस् । सत्वगुण का अर्थ 'पवित्रता' है।

शाब्दिक अर्थ : "अस्तित्व, वास्तविकता"

विशेषण : सात्विक

सात्त्विक वस्तुएं

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