गाय और आस्था

जानिए कैसे मंदिर जाने से भी ज्यादा पुण्य मिलता हैं गौ दर्शन से

 गौ दर्शन से

जीवन मे पुण्य और लाभ को पाने के लिए जाने कितने लोग क्या-क्या करते हैं| कितने सारे धर्म-कर्म करते हैं| हमारे शास्त्रों मे कितने सारे काम हैं जिन्हें करने से हमें ही नही साथ-साथ कितने लोगों को पुण्य की प्राप्ति होती हैं| लेकिन गरुड़ पुराण मे ऐसी कई चीज़ें बताई गई हैं जिन्हें मात्र देखने से या यू कहें की जिनके दर्शन मात्र करने से हमें पुण्य की प्राप्ति होती हैं| इसलिए हम ऐसी ही कुछ चीज़ों के बारे मे बताएँगे जिनके दर्शन मात्र से आप, हम और सारे लोग पुण्य की प्राप्ति कर सकते हैं और साथ-साथ लाभ की भी प्राप्ति  कर सकते हैं|

गरुड़ पुराण मे एक श्लोक लिखा हुआ हैं-

 

जय गौ माता जय गोपाल

जय गोपाल

जय गौ माता जय गोपाल
जय श्री राधे राधे.......
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बचालो रे बचालो गाय माता को बचालो 
यही जीवन का प्राण है, यही जीवन का आधार है,

ये नही है कोई जानवर, यह गलत फहमी मिटा के, बचालो रे बचालो गाय माता को बचालो 
गाय माता जब बचेगी, तभी हम भी बचेगे 
गौ की सेवा जब होगी, तभी हम भी सुख शांति से रहेगे
हो......मेरे प्यारे....गौ वत्स बनके गाय माता को बचालो ह
बचालो रे बचालो गाय माता बचालो 
जय गौ माता जय गोपाल

गाय बचाओ -मानवता बचाओ .

गाय बचाओ -मानवता बचाओ .

गाय मनुष्य जाती की सबसे अच्छी मित्र है
गाय हमें दूध देती है
गाय के गोबर से कंडे बनतें हैं जो हमारा खाना बनाने में मदद करतें हैं .
क्यों बचपन में ऐसा ही कुछ निबंध में लिखते थे
बचपन की शितानियाँ और दोस्त तो याद है लेकिन ये निबंध भूल गए .

क्यूँ क्या गाय ने ढूध देना बंद कर दिया ,गाय अब गोबर नहीं देती .?
गाय बचाओ -मानवता बचाओ 

क्या ईस्लाम धर्म गौ वध करने ईजाजत देता है ?

1.गाय का दुध और घी तुम्हारी तंदुरुसती के लिए बहुत जरुरी है। उसका गोश्त नुकशानदेह और बीमारी पैदा करता है। जबकि उसका दुध भी दवा है l -हजरत मुहम्मद ( नासिहातै हादौ )

2.गाय का दुध बदन की खुबसुरती और तंदुरुस्ती बढाने का बङा जरिया है-हजरत मुहम्मद (बेगम हजरत आयशा से)

3.बिना शक तुम्हारे लिए चौपायो मे भी सीख है।गाय के पेट की चीजो में से गोबर और खुन के बीच में से साफ दुध,जो पीनेवालो के लिए स्वादवाला है,हम तुम्हे पिलाते है।(कुरान शरीफ 16-66)

4.मुगल बादशाह ने बताया है कि “मुस्लमान को गाय नही मारनी चाहिए।ऐसा करना हदीस के खिलाफ है” (मौलाना हयात साहब खानखाना हाली समद साहब)

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