गाय और आस्था

गावो धन्याः सनातनाः।।

गावो धन्याः

गावः पवित्रं परमं
गावो मांगल्यमुत्तमम् ।
गावः स्वर्गस्य सोपानं

गावो धन्याः सनातनाः।।"

'गायें परम पवित्र, परम मंगलमयी, स्वर्ग
का सोपान, सनातन एवं धन्यस्वरूपा हैं।'
...

'गाय पशु नहीं बल्कि सुंदर अर्थतन्त्र है।'
गाय का देश की अर्थव्यवस्था में
भी काफी महत्त्व है। गाय का दूध, घी,
मक्खन, झरण (गौमूत्र), गोबर
आदि सभी जीवनोपयोगी तथा लाभकारी चीजें
हैं।

इतना ही नहीं, गाय के रोएँ और
निःश्वास भी मानव-जीवन के लिए आवश्यक
हैं। इस बात की पुष्टि वैज्ञानिकों ने
भी अपने प्रयोगों से की है।

देशी गाय में वात्सल्य भावना कूट—कूटकर भरी होती है

देशी गाय में वात्सल्य भावना कूट—कूटकर भरी होती है

भारतीय देशी गाय में वात्सल्य भावना कूट—कूटकर भरी होती है। वह अपने बच्चे को जन्म देने के बाद 18 घंटे तक चाटती—दुलारती रहती है। यही कारण है कि सैंकड़ों बछड़ों के बीच भी अपने बच्चे को पहचान लेती है। और तो और, गाय जबतक अपने बच्चे को दूध नहीं पिलाती है, तबतक दूध नहीं देती है। जबकि भैंस या जर्सी गाय चारा खाते ही दूध दूहने की अनुमति दे देती है। यही कारण है कि गाय का दूध पीने वाले बच्चे में काफी शांत और सौम्य आचरण एवं व्यवहार ज्यादा देखे गए हैं।

जानिए कैसे मंदिर जाने से भी ज्यादा पुण्य मिलता हैं गौ दर्शन से

 गौ दर्शन से

जीवन मे पुण्य और लाभ को पाने के लिए जाने कितने लोग क्या-क्या करते हैं| कितने सारे धर्म-कर्म करते हैं| हमारे शास्त्रों मे कितने सारे काम हैं जिन्हें करने से हमें ही नही साथ-साथ कितने लोगों को पुण्य की प्राप्ति होती हैं| लेकिन गरुड़ पुराण मे ऐसी कई चीज़ें बताई गई हैं जिन्हें मात्र देखने से या यू कहें की जिनके दर्शन मात्र करने से हमें पुण्य की प्राप्ति होती हैं| इसलिए हम ऐसी ही कुछ चीज़ों के बारे मे बताएँगे जिनके दर्शन मात्र से आप, हम और सारे लोग पुण्य की प्राप्ति कर सकते हैं और साथ-साथ लाभ की भी प्राप्ति  कर सकते हैं|

गरुड़ पुराण मे एक श्लोक लिखा हुआ हैं-

 

गाय बचाओ -मानवता बचाओ .

गाय बचाओ -मानवता बचाओ .

गाय मनुष्य जाती की सबसे अच्छी मित्र है
गाय हमें दूध देती है
गाय के गोबर से कंडे बनतें हैं जो हमारा खाना बनाने में मदद करतें हैं .
क्यों बचपन में ऐसा ही कुछ निबंध में लिखते थे
बचपन की शितानियाँ और दोस्त तो याद है लेकिन ये निबंध भूल गए .

क्यूँ क्या गाय ने ढूध देना बंद कर दिया ,गाय अब गोबर नहीं देती .?
गाय बचाओ -मानवता बचाओ 

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