गौभक्त विचार

'गाय' शब्द का अर्थ

'गाय' शब्द का अर्थ 
वेदों और शब्द "गो ", जो अंग्रेजी शब्द स्मृती' में एक व्यापक अर्थ है. 'गाय' के लिए कहा गया है, इसमें केवल गाय, बैल और बछडे बल्कि दूध, गौमूत्र और गोबर भी शामिल है.हमारे लिए, 'गाय' मूल रूप से हमारे स्वदेशी नस्लों की गाय, जिसमे कुछ निहित दिव्य और प्रमाणित गुण है, 50 से अधिक स्वदेशी नस्लों, जिनमें से कुछ के नाम नीचे का उल्लेख कर रहे हैं 

गौ या गाय हमारी संस्कृति की प्राण है

गौ या गाय हमारी संस्कृति की प्राण है

गौ या गाय हमारी संस्कृति की प्राण है। यह गंगा, गायत्री, गीता, गोवर्धन और गोविन्द की तरह पूज्य है।

प्रभु ---आप तो हर जगह हो -फिर इतना सब्र कैसे ।

प्रभु ---आप तो हर जगह हो -फिर इतना सब्र कैसे ।

प्रभु ---आप तो हर जगह हो -फिर इतना सब्र कैसे ।
क्यों गौ -को माँ का दर्जा देकर -आप बेफिक्र कैसे ।।१-
कितना दुःख -सब्र करेगा हिन्दू -इन कन्सो से ।
बाबर गजनी -अंग्रेज और रावन के इन वन्सो से ।।२-
अब तो सहन नहीं होता है -रात दिन बेचैन किया ।
भारत में -अपनों ,गैरों ने -दुःख अपरम्पार दिया ।।३-
मानवता की हत्या हो रही -दर्द कीसीमा पार हुई ।
जीवन जीना दुर्लभ हो गया -बे पर्दा अब नार हुई ।।४-
लुट मची है धनवानों की -मरता रोज़ गरीब है ।
क्या मै समझू मेरे कृष्णा -कलयुग अंत करीब है ।।५-
कैसे होगा अंत नीच का -राम तुम्हे आना होगा ।

बचालो रे बचालो गाय माता को बचालो

बचालो रे बचालो गाय माता को बचालो

जय गौ माता जय गोपाल
जय श्री राधे राधे.......
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बचालो रे बचालो गाय माता को बचालो 
यही जीवन का प्राण है, यही जीवन का आधार है,
ये नही है कोई जानवर, यह गलत फहमी मिटा के, बचालो रे बचालो गाय माता को बचालो 
गाय माता जब बचेगी, तभी हम भी बचेगे 
गौ की सेवा जब होगी, तभी हम भी सुख शांति से रहेगे
हो......मेरे प्यारे....गौ वत्स बनके गाय माता को बचालो ह
बचालो रे बचालो गाय माता बचालो 
जय गौ माता जय गोपाल

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