गौभक्त विचार

गाय काटने वालो का क्यों ना सर कलम कर दिया जाये

" गाय " जिसे हमारे धर्म (हिन्दू) में माता का दर्जा प्राप्त है। अब माता क्यों कहा जाता है ये सबको पता है। भारत कि गौरवशाली परंपरा में गाय का स्थान सबसे ऊँचा और अत्यन्त महत्वपूर्ण रहा है। गाय माता की महिमा पर महाभारत में एक कथा आती है। यह कथा रघुकुल के राजा नहुष और महर्षि च्यवन की है, जिसे भीष्म पितामह मे महाराजा युधिष्ठिर को सुनाया था।

 

हम गौ सेवा कैसे करें?

हम गौ सेवा कैसे करें?

हम गौ सेवा कैसे करें?
हम गौ सेवा कैसे करें , कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है ,
इसकेलिए यह जानना जरुरी है की हम गौ सेवा निम्न प्रकार से कर सकते है :-

'गाय' शब्द का अर्थ

'गाय' शब्द का अर्थ 
वेदों और शब्द "गो ", जो अंग्रेजी शब्द स्मृती' में एक व्यापक अर्थ है. 'गाय' के लिए कहा गया है, इसमें केवल गाय, बैल और बछडे बल्कि दूध, गौमूत्र और गोबर भी शामिल है.हमारे लिए, 'गाय' मूल रूप से हमारे स्वदेशी नस्लों की गाय, जिसमे कुछ निहित दिव्य और प्रमाणित गुण है, 50 से अधिक स्वदेशी नस्लों, जिनमें से कुछ के नाम नीचे का उल्लेख कर रहे हैं 

गौ या गाय हमारी संस्कृति की प्राण है

गौ या गाय हमारी संस्कृति की प्राण है

गौ या गाय हमारी संस्कृति की प्राण है। यह गंगा, गायत्री, गीता, गोवर्धन और गोविन्द की तरह पूज्य है।

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