गौभक्त विचार

प्रभु ---आप तो हर जगह हो -फिर इतना सब्र कैसे ।

प्रभु ---आप तो हर जगह हो -फिर इतना सब्र कैसे ।

प्रभु ---आप तो हर जगह हो -फिर इतना सब्र कैसे ।
क्यों गौ -को माँ का दर्जा देकर -आप बेफिक्र कैसे ।।१-
कितना दुःख -सब्र करेगा हिन्दू -इन कन्सो से ।
बाबर गजनी -अंग्रेज और रावन के इन वन्सो से ।।२-
अब तो सहन नहीं होता है -रात दिन बेचैन किया ।
भारत में -अपनों ,गैरों ने -दुःख अपरम्पार दिया ।।३-
मानवता की हत्या हो रही -दर्द कीसीमा पार हुई ।
जीवन जीना दुर्लभ हो गया -बे पर्दा अब नार हुई ।।४-
लुट मची है धनवानों की -मरता रोज़ गरीब है ।
क्या मै समझू मेरे कृष्णा -कलयुग अंत करीब है ।।५-
कैसे होगा अंत नीच का -राम तुम्हे आना होगा ।

बचालो रे बचालो गाय माता को बचालो

बचालो रे बचालो गाय माता को बचालो

जय गौ माता जय गोपाल
जय श्री राधे राधे.......
जरूर पढे और शेयर करे 
बचालो रे बचालो गाय माता को बचालो 
यही जीवन का प्राण है, यही जीवन का आधार है,
ये नही है कोई जानवर, यह गलत फहमी मिटा के, बचालो रे बचालो गाय माता को बचालो 
गाय माता जब बचेगी, तभी हम भी बचेगे 
गौ की सेवा जब होगी, तभी हम भी सुख शांति से रहेगे
हो......मेरे प्यारे....गौ वत्स बनके गाय माता को बचालो ह
बचालो रे बचालो गाय माता बचालो 
जय गौ माता जय गोपाल

गोसेवा के चमत्कार

गोसेवा के चमत्कार

जय गौ माता------------- जीवनदान-----------(लेखक - वैध पंचानन के० के० श्रीनिवासाचार्य) -----------
गोसेवा के चमत्कार (सच्ची घटनाएँ
स० १९९१ का आषाढ़ मास था | नोहर (बीकानेर) से लगभग ढेड मील डालूराम महर्षि का जोहंड (तालाब) है | पन्द्रह दिन पहले कुछ वर्षा हुई थी, जिसक कुछ कीचड अवशेष था | एक प्यासी गौ जल की इच्छा से जोहंड में घुसी, परन्तु कीचड़ में घुटनों तक डूब गयी | गौ वृद्धा तो थी ही, निकलने के प्रयास से बेहद थक ही गयी | खड़ा रहना दूभर हो गया | बैठकर कीचड में धसँ गयी |

कलियुग और गौमाता

कलियुग और गौमाता

गौमाता को एक ग्रास खिला दीजिए तो वह सभी देवी-देवताओं को पहुँच जाएगा । इसीलिए धर्मग्रंथ बताते हैं समस्त देवी-देवताओं एवं पितरों को एक साथ प्रसन्न करना हो तो गौभक्ति-गोसेवा से बढ़कर कोई अनुष्ठान नहीं है ।

भविष्य पुराण में लिखा है गौमाता के पृष्ठदेश में ब्रह्म का वास है, गले में विष्णु का, मुख में रुद्र का, मध्य में समस्त देवताओं और रोमकूपों में महर्षिगण, पूँछ में अन्नत नाग, खूरों में समस्त पर्वत, गौमूत्र में गंगादि नदियाँ, गौमय में लक्ष्मी और नेत्रों में सूर्य-चन्द्र हैं ।

भगवान भी जब अवतार लेते हैं तो कहते हैं-
【‘विप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार।‘】

Pages