गौभक्त विचार

यदि हम गौओं की रक्षा करेंगे तो गायें भी हमारी रक्षा करेंगी।

यदि हम गौओं की रक्षा करेंगे तो गायें भी हमारी रक्षा करेंगी। 
गांव की आवश्यकता के अनुसार प्रत्येक घर में तथा घरां के प्रत्येक समूह में एक गो शाला होनी चाहिए। 
दूध गरीब-अमीर सबको मिलना चाहिए। 
गृहस्थों को पर्याप्त गोचरभूमि मिलनी चाहिए। 
गौओं को बिक्री के लिए मैलों में भेजना बिल्कुल बंद कररना चाहिए, क्योंकि इससे कसाइयों को गाय खरीदने में सुविधा होती है
किसानों की स्थिती सुधार के लिए दिये जाने वाले इन सुझावों तथा अन्य सुझावों को कार्यरूप में परिणित करने
के लिए ग्राम पंचायतोंका निर्माण होना चाहिए। -

एक माँ का दर्द ..........

एक माँ का दर्द ..........

में आप की गाय माता बोल रही हू

क्या आप को पता है की मेरी हत्या की क्या साजा है ? सायद नहीं और जो साजा इन दरिंदों को मिलती है मेरी हत्या की आप को लगता है की य काफी है ??

मेरी हत्या की साजा केवल 5 से 6 साल है य फिर जुरमाना दे कर भी छुट जाते है ! बहुत से केसों में तो पुलिस वाले उनेहे पैसे लेकर ही छोड़ देते है !

में आप से पूछ रही हू की आप की माँ के हत्यारों को य साजा काफ्ही है ??

अगर आप की माँ होती तो क्या आप तबभी कुछ नहीं कहेते !

है सायद में एक बेजबान जानवर ही तो हू

गाय ही श्रेष्ठ क्यों’

गाय ही श्रेष्ठ क्यों’’? मात्र कम फैट वाले दूध के कारण हमने गाय को पालना कम कर दिया और भैंसों का पालन बढ़ा दिया। कभी ये नहीं सोचा कि फैट व दूध की मात्रा के साथ गुणों का ध्यान भी रखा जाना चाहिये। ‘शंख’ चाहे जितना बड़ा हो पर छोटे से ’’मोती’ की बराबरी नहीं कर सकता। वनस्पति घी तथा देशी घी में फैट समान है फिर भी दोनों के भावों में दुगना अंतर है क्योंकि दोनों के गुणों में अंतर है। तो फिर गाय और भैंस के दूध—दही—मक्खन, घी आदि में भी अतंर होता है इस बात को स्वीकार करना चाहिये। 

गाय बची तो ही देश बचेगा, सभ्यता बचेगी

भारत की संस्कृति, समृद्वि और सभ्यता का आधार गंगा, गौ, गायत्री, गीता और गुरु ही रही है।

भारत की संस्कृति प्रकृति मूलक संस्कृति है। दुनिया के

प्राचीनतम ग्रन्थ वेदो में कण-कण के प्रति अहोभाव कीh अभिव्यक्ति है। हमने सूर्य-चन्द्र, ग्रह नक्षत्र, पशु-पक्षी, जीव-जन्तु, पेड़-पौधों को पूज्य माना है। प्रकृति का कण-कण हमें देता है। इसीलिए कण-कण में देवाताओं का निवास माना है।

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