गौ आधारित कृषि

वैदिक काल में समद्ध खेती का मुख्य कारण कृषि का गौ आधारित होना था।

वैदिक काल में समद्ध खेती का मुख्य कारण कृषि का गौ आधारित होना था।

वैदिक काल में समद्ध खेती का मुख्य कारण कृषि का गौ आधारित होना था। प्रत्येक घर में गोपालन एवं पंचगव्य आधारित कृषि होती थी, तब हम विश्व गुरू के स्थान पर थे। भारतीय मनीषियों ने संपूर्ण गौवंश को मानव के अस्तित्व, रक्षण, पोषण, विकास एवं संवध्र्रन के लिये आवश्यक समझा और ऐसी व्यवस्थाऐं विकसित की थी जिसमें जन मानस को विशिष्ट शक्ति बल तथा सात्विक वृद्धि प्रदान करने हेतु गौ दुग्ध, खेती के पोषण हेतु गोबर-गौमूत्र युक्त खाद, कृषि कार्याे एवं भार वहन हेतु बैल तथा ग्रामद्योग के अंतर्गत पंचगव्यों का घर-घर में उत्पादन किया जाता था। प्राचीन काल से ही गोपालन भारतीय जीवन शैली व अंर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग रहा

कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था में गाय की भूमिका

भारतीय संस्कृति में गाय का महत्व, गायत्री गंगा और गीता से भी बढ़कर है, क्योंकि गायत्री की साधना में कठिन तपस्या अपेक्षित हैं, गंगा के सेवन के लिये भी कुछ त्याग करना ही पड़ता है और गीता को जितनी बार पढ़ोगे उसमें हर बार कुछ न कुछ नया मिलता है, जिसका रहस्य समझना कठिन है, लेकिन गौ का लाभ तो घर बैठे ही मिल जाता है। वेदों का कथन है कि यदि किसी को इस माया राज्य में सब प्रकार का वैभव प्राप्त करना है तो गौ माता की प्रमुख रूप से सेवा करें। यहाँ प्रश्न पैदा होता है कि गौ की महिमा का शास्त्रों में जो वर्णन है, क्या उसे सत्य माना जा सकता है ?

गाय भी बन सकती है भैस से बेहतर ..

आज की बछड़ी कल की होने वाली गाय-भैंस है। जन्म से ही उसकी सही देखभाल रखने से भविष्य में वह अच्छी गाय भैंस बन सकती है। स्वस्थ बचपन में अगर बछड़ियों का वजन लगातार तेजी से बढ़ता है तो वे सही समय पर गायश्भैंस बन जाती है। पषु पालक को एक गायश्भैंस से ज्यादा ब्यांतश्ज्याद दूध मिलने से अधिक लाभ होता है। ब्यांहने के पहले, आखिरी के दो महीनों में गर्भ बहुत तेजी से बढ़ता है। इन्ही दो महीनों में गायश्भैंस की पाचन षक्ति कम हो जाती है। ऐसे में संतुलित पशु आहार खिलाना बहुत जरूरी है। बच्चादानी में तेजी से बढ़ रहे बछड़े की सम्पूर्ण बढ़ोत्तरी के लिए गायश्भैंस को आखरी के दो महीने अच्छी गुणवत्ता का संतुलित आहार रोजाना

गौशाला प्रबंधन एवं कार्यों की जानकारी एवं संयोग

गौशाला प्रबंधन एवं कार्यों की जानकारी एवं संयोग

श्रीमान सादर नमस्कार।
गौ परिषद राजस्थान एक प्रदेश स्तर की स्वयंसेवी संस्था है। इसके द्वारा गौशाला संबंधित सभी प्रकार की जानकारी निशुल्क उपलब्ध करवाई जाती है जो इस प्रकार हैः-
1. समिति रजिस्ट्रेशन एवं नवीनीकरण, कार्यकारणी चुनाव, समिति के संविधान में संशोधन, समिति का नाम सुधार या नाम परिवर्तन आदि में सहयोग।
2. कार्यवाही लिखना एवं बैठक कार्रवाई लिखने में मदद करना एवं इसके लिए उपयुक्त जानकारी देना, वार्षिक प्रतिवेदन तैयार करने में सहयोग, आवक-जावक रजिस्टर तैयार करवाने में सहयोग, विजिटर बुक तैयार करने में सहयोग आदि।

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