गौ आधारित कृषि

गौपालन में सावधानियाँ

गौपालन में लगे हुए उद्यमियों को निम्न बिंदूओं का ध्यान रखना आवश्यक है, अन्यथा लाभ में निरंतर कमी आती जाएगी|

क. प्रजनन

(अ) अपनी आय को अधिक दूध वाले सांड के बीज से फलावें ताकि आने वाली संतान अपनी माँ से अधिक दूध देने वाली हो| एक गाय सामान्यत: अपनी जिन्दगी में 8 से 10 बयात दूध देती हैं आने वाले दस वर्षों तक उस गाय से अधिक दूध प्राप्त होता रहेगा अन्यथा आपकी इस लापरवाही से बढ़े हुए दूध से तो आप वंचित रहेंगे ही बल्कि आने वाली पीढ़ी भी कम दूध उत्पादन वाली होगी| अत: दुधारू गायों के बछड़ों को ही सांड बनाएँ|

एक गाय, पांच एकड़ खेती

एक गाय, पांच एकड़ खेती

हींग लगे न फिटकरी, रंग चढ़े चोखा। शून्य लागत पर प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए यह कहावत सच साबित हो रही है। बिना रासायनिक खाद व कीटनाशक के प्रयोग के सिर्फ गोबर व गोमूत्र के प्रयोग से अनाज व सब्जी का अधिक उत्पादन मिलने लगा है। अपने पास अगर एक गाय है, तो पांच एकड़ तक खेती के लिए खाद की चिंता नहीं रहेगी। बस गोबर और गुड़ से ही फसल लहलहाएगी। गुणवत्तापूर्ण अधिक उत्पादन भी मिलेगा।

जीरो बजट या कुदरती खेती क्या है ?

जीरो बजट की खेती

जीरो बजट खेती  का अर्थ है  की  चाहे  कोई भी  फसल हो उसका उपज मोल ज़ीरो होना चाहिए। (कॉस्ट ऑफ़ प्रोडक्शन विल बी जीरो ) कुदरती खेती मैं इस्तेमाल होने  वाले साधन बाजार  से  खरीद  कर नहीं डाले  जाने चाहिए। वो सरे  साधन और तत्व पौधे  की जड़ों के आस पास  ही पड़े  होते हैं। अलग से  बन  बनाया  कुछ  भी डालने  की  जरूरत  नहीं   है। हमारी धरती  पूर्ण तरह से पालन हार  है।

हमारी फसलें धरती से  किनते  प्रतिशत  तत्त्व लेती  हैं ?

कृषि में गोमूत्र और गोबर का महत्व

भारत में और भारत के अतिरिक्त अन्य देशों में गाय का महत्व मुख्य रूप से दूध और दूध से बने अन्य व्यंजनों के लिए किया जाता है। किन्तु, गाय के मूत्र और गोबर का महत्व कुछ कम नहीं है। हम सभी कृषि में खाद के उपयोग और महत्व को भली-भांति परिचित हैं। अच्छी फसल के लिए केंचुए की खाद, सड़ी-गली पत्तियों की खाद,रासायनिक खाद आदि इस्तेमाल किए जाते हैं।इसके अतिरिक्त गोमूत्र और गोबर उत्तम उर्वरक के रूप में प्रयोग किए जाते हैं। प्राकृतिक उर्वरक गोमूत्र और गोबर सर्वश्रेष्ठ उर्वरक हैं, क्योंकि रासायनिक उर्वरक जहाॅं एक ओर फसलोत्पादन में वृद्धि करते हैं, वहीं खाद्य पदार्थों में और भूमि में पहुॅंच कर उन्हें विषाक्त भ

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