गौ - चिकित्सा

गौ - चिकित्सा भाग - 3 ( जहरवात )

यह रोग अधिकतर मादा ( दूध देने वाले ) पशुओं के थन और साधारण पशुओं के गले ( कण्ठ) में होता है । पहले गले या कण्ठ और थन में एक गाँठ पैदा होती है । कुछ ही घण्टों बाद वह बड़ा रूप धारण कर लेती है । यह रोग हर जगह हो सकता है ।

गौ - चिकित्सा भाग - 2 ( मूत्र रोग )

मूत्ररोग ( पेशाब सम्बन्धी रोग )
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१ - पेशाब का रूक- रूककर आना :-
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गुर्दे की कमज़ोरी के कारण और दाने के साथ पत्ती ,रेत अधिक खा जाने से यह रोग हो जाता है । सूखी घास अधिक खाने से और बाद में पानी पीने से भी यह रोग हो जाता है । इस रोग में पशु अधिक बेचैन रहता है । उसकी पेशाब रूक जाती है । वह पेशाब करने की बार - बार चेष्टा करता है । बार- बार उठता है । परन्तु बार - बार यत्न करने पर भी उसे पेशाब नहीं होती । रोगी पशु पाँव चौड़े करता हैं ।

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