गौ महिमा

"गाय" ........... आप इस शब्द का उच्चारण मात्र कीजिये

"गाय" ........... आप इस शब्द का उच्चारण मात्र

"गाय" ........... आप इस शब्द का उच्चारण मात्र
कीजिये , देखिएगा आपको कितनी आत्म -संतुष्टि मिलेगी |
जी हाँ ! आज का मेरा विषय "गौ माँ" ही है | दोस्तों !!
क्या कभी आपने सोचा है , की एक औरत , किसी दुसरे के
बच्चे को अपना दूध बिना किसी मज़बूरी के
पिला सकती है क्या ?
जवाब मैं देता हूं आपको ---कदापि नहीं |
जी हाँ जब तक कोई ख़ास मज़बूरी ना पड़े , कोई भी औरत
अपना दूध किसी और के बच्चे के साथ नहीं बाँट
सकती ,,,,,,फिर भी वो महान कहलाती है |
तो आप गाय माँ को क्या कह कर पूजेंगे ?? /वो तो एक -

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गाय का दूध गुणों का भण्डार हैं

गाय का दूध गुणों का भण्डार हैं

इस दूध से अनेक बीमारिया सही होती हैं, जिन कारणों से ही भारत के लोगो में गाय के प्रति अपार स्नेह श्रद्धा और मातृत्व भाव होता हैं। आज हम जानेंगे के दूध के ऐसे अनजाने गुण जो हमने कभी सुने ही नहीं थे और जिन वजहों से ये अमृत तुल्य हैं।

जीवन भर गाय का दूध पीने वाले व्यक्ति कैंसर जैसे भयानक रोगो से बचे रहते हैं। इसका दूध निरंतर सेवन करने से हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति इतनी बढ़ जाती हैं के कोई रोग नज़दीक नहीं फटकता। चाहे वो सर्दी खांसी हो, हृदय रोग हो, पेट के रोग, पुरुषो के रोग हो या स्त्रियों के रोग हो।

गाय के दूध में सोना।

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क्या आप जानते हैं गो सेवा करने के क्या- क्या लाभ हैं-

क्या आप जानते हैं गो सेवा करने के क्या- क्या लाभ हैं-

जहां गाय बैठती है, वहां की भूमि पवित्र होती है । गाय के चरणों की धूली भी पवित्र होती है। क्या आप जानते हैं गो सेवा करने के क्या-
क्या लाभ हैं-
1. भगवत्प्रेम की प्राप्ति होती है।
2. जन्म-मरण से मुक्ति मिलती है।
3. संतोष मिलता है।
4. धन में वृद्धि होती है।
5. पुण्य की प्राप्ति होती है।
6. संतान की प्राप्ति होती है।
7. दु:ख दर्द दूर होते हैं।
8. ताप-संताप दूर होते हैं।
9. हृदय प्रफुलिलत होता है।
10. मन को शान्ति मिलती है।
11. स्वास्थ्य लाभ होता है।
12. तृप्ति का अनुभव होता है।
13. मनुष्य जनम सफल होता है।

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33 प्रकार के देवताओं का वास गौमाता में है।

33 प्रकार के देवताओं का वास गौमाता में है।

33 प्रकार के देवताओं का वास गौमाता में है। प्राण, अपान, समान, उदान, व्यान, नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त, धनंजय ये 10 प्राण एवं ग्यारहवां जीवात्मा ये ही एकादश रुद्र हैं। ये जब शरीर से निकल जाते हैं, तो प्राणी रुदन करते हैं। गौ इन रुद्रों की माता कही जाती है क्योंकि हमारे शरीर के 10 प्राण एवं जीवात्मा की पुष्टि गौ दुग्ध से होती है। पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश, सूर्य, चंद्र, तारे ये आठ वसु हैं और समस्त संसार इनमें ही बसा हुआ है। गौ माता इनकी दुहिता है। सूर्य चिकित्सा में वैद्य या हकीम अलग-अलग रंगों की बोतलों में पानी भरकर धूप में रख देते हैं और उनसे मरीजों का इलाज करते हैं। हर रंग की बोतल में स

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