गौ महिमा

गावो भगो गावः इन्द्रो म इच्छाद्रावः सोमस्य प्रथमस्य भक्षः

गावो भगो गावः इन्द्रो म इच्छाद्रावः सोमस्य प्रथमस्य भक्षः

वेदों में गाय का महत्व अतुलनीय व श्रेष्ठतम है। गाय रुद्रों की माता, वसओं की पुत्री, अदिति पुत्रों की बहन तथा अमृत का खजाना है। अथर्ववेद के 21वें सूक्त को गौ सूक्त कहा जाता है। इस सूक्त के ऋषि ब्रह्मा तथा देवता गऊ है। गायें हमारी भौतिक व आध्यात्मिक उन्नति के प्रधान साधन है। मनुष्य को धन–बल–अन्न व यश पाने के लिए गऊ सूक्त का रोज़ पाठ करना चाहिए। आरोग्य व पराक्रम पाने के लिए गाय के दूध, मक्खन व घी का सेवन करने से पूर्व इस सूक्त का पाठ मात्र करने से सर्वारिष्ट शांत होते है।

माता रुद्राणां दुहिता वसूनां स्वसादित्यनाममृत्सय नाभिः।

Blog Category: 

गाय अपने निःश्वास में ऑक्सीजन छोड़ती है।

गाय अपने निःश्वास में ऑक्सीजन छोड़ती है।

गाय अपने निःश्वास में ऑक्सीजन
छोड़ती है। डा. जूलिशस व डॉ. बुक
(कृषि वैज्ञानिक जर्मनी)।

गाय अपने सींग के माध्यम से कॉस्मिक
पावर ग्रहण करती है।

एक थके माँदे व तनावग्रस्त
व्यक्ति को स्वस्थ एवं सीधी गाय के नीचे
लिटाने से उसका तनाव एवं थकावट कुछ
ही मिनटों में दूर हो जाती है
तथा व्यक्ति पहले से ज्यादा ताजा एवं
स्फूर्तियुक्त हो जाता है। (वैज्ञानिक
पावलिटा, चेक यूनिवर्सिटी)।

Blog Category: 

गाय के भीतर "सूरज केतु"नामक एक नाड़ी होती है|

गाय के भीतर "सूरज केतु"नामक एक नाड़ी होती है|

प्रत्येक व्यक्ति को उसके शरीर में स्वर्ण{GOLD}
की आवश्यकता होती है पर व्यक्ति स्वर्ण
खा तो नहीं सकता?गाय के भीतर "सूरज केतु"नामक एक
नाड़ी होती है|जब सूर्य की किरणें गाय के भीतर प्रवेश कर
उस नाड़ी पर पड़ती हैं तो उस नाड़ी के माध्यम से प्राकृतिक
रूप से स्वर्ण बनता है तभी गाय का दूध पीलेपन को धारण
किऐ होता है|इस प्रकार से प्रत्येक व्यक्ति के भीतर
स्वर्ण भी पहुँच जाता है|यह नाड़ी गाय के अलावा अन्य
किसी जीव में नहीं होती|प्रभु द्वारा की गई इस सुंदर
व्यवस्था की रक्षा कीजिऐ और कामधेनु कल्याण परिवार

Blog Category: 

गोवर्धनधारी की दुलारी गौ माँ

गोवर्धनधारी की दुलारी गौ माँ

गोवर्धनधारी की दुलारी गौ माँ
साधु संतोँ मुनियोँ की प्यारी गौ माँ
ममता की मृदु फुलवारी गौ माँ
पर्यावरण की रखवाली गौ माँ
मानव पे सदा उपकारी गौ माँ
कदम कदम सुखकारी गौ माँ
हाय फिर भी है दुखियारी गौ माँ
संकट मेँ आज है हमारी गौ माँ
.
गौमाता का दूध अमृत समान है
गोबर और मूत्र भी गुणोँ की खान हैँ
रक्तचाप मधुमेह ज्वर अस्थमा
कैँसर जैसे रोगोँ का ये करे खात्मा
गौमूत्र के जैसे एंटीबॉयटिक नहीँ है
घी से ज्यादा कुछ स्वास्थ्यदायक नहीँ है
हृदय रोग मेँ भी गुणकारी गौ माँ
संकट मेँ आज है हमारी गौ माँ
.

Blog Category: 

Pages