गौ समाचार

हैरान कर देने वाली बात दूध नहीं देती गाय फिर भी सालाना 3.50 करोड़ का मुनाफा पर कैसे ?

हरियाणा लाडवा : इनके गोशाला में एक भी गाय दूध नहीं देती, फिर भी इनका सालाना मुनाफा करीब 3.50 करोड़ रुपये हैं, है ना चौकाने वाली बात. ऐसा भी नहीं है कि ये किसी अनैतिक व्यापार के जरिये इतना पैसा कमाते हैं. बल्कि इन्होने इस व्यापार के लिए उन गायों को चुना जिन्हें, दूध न दे पाने के कारण लावारिस छोड़ दिया जाता है. कई तरह की बीमारियों के कारण सड़कों पर ये गायें लावारिस पड़ी रहती हैं. ऐसे गायों को एक-एक कर गोशाला में लाकर पहले तो ये सबका इलाज करवाते हैं. फिर इन गायों की सही से देख रेख शुरु होता है, इनका पूरा व्यापार गोबर और गोमूत्र पर चलता है. ये पूरी कहानी है Haryana के लाडवा की.

किसको कहते हैं 'पवित्र गाय' ?

भारत में गाय का धार्मिक महत्व हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार गाय में देवी-देवता 'वास' करते हैं इसलिए इसे पावन माना जाता है और समाज में इसकी पूजा की जाती है. तो सवाल ये है कि वह गाय कौन सी है जिसे पूजनीय माना जाता रहा है ? क्या दुनिया की सारी गायें उतनी ही पवित्र हैं या फिर सिर्फ़ वही जो अखंड भारत में पैदा हुई हैं.

गोसेवा इतनी की बीवी को भी छोड दिया ,

मुस्लिम युवक की बीवी ने कहा,उसे चुनो या गाय ,उत्तरप्रदेश में एक मुस्लिम को अपनी 14 गायो से इतना प्यार था की उसके लिए अपनी पत्नी को भी छोड़ दिया , मूलरूप से कानपूर देहात के रहने वाले अफक अली उर्फ़ मुन्ना ने बताया की जब उनकी पत्नी ने गायो या पत्नी मेसे किसी एक को चुनने को कहा तो उन्होंने गायो को चुन लिया हालांकि यह कहानी 13 वर्ष पहले की है लेकिन आज जब गौरक्षक समूहों ने बीफ खाने और गायो के मसले पर मुस्लिमो पर निशाना साधा तब अफक ने इस वाकए को साझा किया, वर्ष 2001 में शादी के कुछ दिन बाद ही अफक की बीवी अफरोज उनका फैसला सुनते ही घर छोड़कर चली गयी । पंचायत ने दोनो

गाय ने बदल दी गांव की जिंदगी

गाय ने बदल दी गांव की जिंदगी

मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के इमलिया गौंडी गांव के लोगों की जिंदगी में गौ-पालन ने बड़ा बदलाव ला दिया है। एक तरफ जहां वह लोगों के रोजगार का जरिया बन गई है, वहीं गाय की सौगंध खाकर लोग नशा न करने का संकल्प भी ले रहे हैं। इमलिया गौंडी गांव में पहुंचते ही 'गौ संवर्धन गांव' की छवि उभरने लगती है, क्योंकि यहां के लगभग हर घर में एक गाय है। इस गाय से जहां वे दूध हासिल करते हैं, वहीं गौमूत्र से औषधियों और कंडे (उपला) का निर्माण कर धन अर्जन कर रहे हैं। इस तरह गांव वालों को रोजगार भी मिला है। भोपाल स्थित गायत्री शक्तिपीठ द्वारा इस गांव के जंगल में गौशाला स्थापित की गई है। इस गौशाला के जरिए उन परिवारों को

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