गौ समाचार

भारत के इतिहास में पहली बार हुआ

भारत के इतिहास

एक ऐसा आन्दोलन जो भारत के इतिहास में पहली बार हुआ था जब गौमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने हेतु ५ लाख से भी ज्यादा गौभक्तों ने दिल्ली में हुंकार भरी फिर भी सरकार की आँखे नही खुली , बिकाऊ भाड़ मिडिया आँखों पर पट्टी बांधकर बेठ गयी। इतनी बड़ी न्यूज़ की भनक तक ना पडने दी भाड़ मिडिया ने ।

अरे ऐ बिकाऊ मिडिया वालो इस बार 18 फरवरी 2018 को देख लेना .. ये लड़ाई आर या पार की होगी या तो हम नही रहेंगे या देश के गद्दार नही रहेंगे । और आखरी सांस तक हम लड़ते रहेंगे और गौमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाकर ही रहेंगे ।। @सुरेश क्रांति

आस्था की दृष्टि से देखा जाना चाहिए गाय को : पूज्य श्री गोपाल मणिजी

देश के 375 जिल्लो में गौमाता का प्रचार करते हुए बस्तर पहुचे गौक्रांति अग्रदूत गोपाल मणिजी जी ने रविवार को चेंबर सभागार में धेनु मानस गोकथा कही । उन्होंने गाय को हिन्दुओ की आस्था का प्रतीक बताते हुए कहा कि सरकार गाय को माता नही मानती। वह आंदोलन की भाषा समझती है और हमे लोगो में जनजागरण करना है । गाय को आस्था की दृष्टि से देखा जाना चाहिए । गाय को बचाने के लिए देश में अलग से गौ मंत्रालय हो । और विधालयो में 10 साल तक के बच्चो को गाय का दूध देना अनिवार्य किया जाए । आखिल भारतीय गौ रक्षा द्वारा आयोजित गौ प्रतिष्ठा भारत यात्रा के तहत पूज्य गोपाल मणिजी का बस्तर 376 वा पड़ाव है । धेनुमानस गौ कथा के संद

विजयवाडा में धेनु मानस गौ कथा आयोजित 

गोमाता

विजयवाडा 20 फरवरी ( पर्वत शर्मा ) स्थानीय वनटाउन स्थित श्री सुखदेव  राठी महेश्वरी भवन में गत रात्रि श्री गौमाता गौ सेवा ट्रस्ट द्वारा धेनुमानस गौ कथा का आयोजन किया गया । गत 9 मई 2016 को गंगोत्री से यात्रा प्रारम्भ कर 365वे जिले( कृष्णा ) विजयवाडा में पधारे श्री गोपाल मणिजी महाराज ने कथा सुनाई ,उन्होंने कथा में गौमाता से जुड़े अनेक फायदे बताते हुए कहा की " गौमाता के बोलने से जो माँ की आवाज निकलती है उनको सुनने से कान का बहरापन ठीक हो जाता है और माँ ध्वनि मंदिरो में घण्टी बजाने का काम करती है। गौ कथा में सरकार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली की भारत सरकार गाय को गौमात

गाय ने बाघ को मारा

ये खबर लगती तो अविश्वसनीय सी है लेकिन ये सच है कि एक बाघ को एक गाय ने मार डाला.

बाघ शुक्रवार को गाय के बाड़े में घुस गया था जहाँ गाय ने उसे सिंग से मार-मारकर इतना घायल कर दिया था कि शनिवार को उसकी मौत हो गई.

हालांकि वन अधिकारियों का कहना है कि बाघ पहले से घायल था और गाय से मिली चोट की वजह से वह बच नहीं सका.

असहाय बाघ

ये घटना तमिलनाडु में कोयम्बटूर के वालपराई की है.

चाय उगाने वाले इस गाँव के एक व्यक्ति ज्ञानशेखरन ने शुक्रवार की सुबह क़रीब साढ़े छह बजे देखा कि उसकी गाय के बाड़े में एक बाघ घुसा बैठा है.

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