गौ समाचार

गोपाष्टमीः गाय की सेवा कर ऐसे बनें भाग्यशाली !!

आज मंगलवार के दिन  गाय माता की सेवा कर भारतीय संस्कृति का प्रमुख पर्व गोपाष्टमी मनाया गया. गोपाष्टमी भारतीय संस्कृती का प्रमुख त्योहार माना गया हैं. इस दिन गाय माता की पूजा की जाती हैं. गौमाता को विश्वमाता कहा जाता हैं. क्योंकि गौमाता ममतामयी, त्याग, बलिदान और आत्मीयता कहा का प्रतिक हैं. जंगल में जंगली जानवरों से सामना होने पर गाय खुद की जान जोखिम में डाल देती है. और झुंड बनाकर अपने पालक और रक्षक को घेरकर उनकी जान बचाती है.

गोलासन नंदीशाला को लेकर आया नया मोड़, ग्रामीणों ने कहा हम नही चला पायेंगे नंदीशाला साँचोर.

गोलासन ग्राम में स्थित विश्व की सबसे बड़ी नंदीशाला श्री हनुमान महावीर गोशाला को लेकर मंगलवार को एक बड़ा मोड़ आया है। पूर्व में चला रही नंदीशाला की ट्रस्ट ने 6 नवंबर को अतिक्रमण के विवाद को लेकर चाबी प्रशासन को सौप दी थी। जिसके बाद से प्रशासन् नदीशाला को चलाता आ रहा था। वही 17 नवंबर को नंदीशाला चलाने के लिए ग्रामीणों ने  गोपालन मंत्री ओटाराम देवासी सहित जिले के जनप्रतिनिधि व अधिकारियों की मौजूदगी में लिखित में दिया था कि हम 20 ग्रामीणों की कमेटी बनाकर गोशाला को चलायेंगे। जिसपर उन्होंने पांच दिन का समय मांगा। वही सोमवार को तहसीलदार ने नंदीशाला में रखे संसाधन की सुचिबंध बनाकर मंगलवार को सोपने की

भागवत कथा में पहुंचे मुस्लिम, आरती कर लिया गो-सेवा का संकल्प

भागवत कथा में आरती उतारते मुस्लिम भाई

गुना। मध्यप्रदेश के गुना जिले के कुछ मुसलमानों में एकता की अनूठी मिसाल पेश की है। जिले का बरसत गांव आज नशे का गढ़ बन चुका है तो वहीं दूसरी और बरसत गांव में इन दिनों श्री मद्भागवत ज्ञान गंगा की अमृत वर्षा हो रही है।

कही आप अंजाने मे अपने परिवार को विषैला दूध तो नही पिला रहे है?

कही आप अंजाने मे अपने परिवार को विषैला दूध तो नही पिला रहे है?

मथुरा के ‘पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधन संस्थान’ में नेशनल ब्यूरो आफ जैनेटिक रिसोर्सिज़, करनाल (नेशनल क्रांऊसिल आफ एग्रीकल्चर रिसर्च-भारत सरकार) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. देवेन्द्र सदाना द्वारा एक प्रस्तुति 4 सितम्बर को दी गई।

मथुरा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के सामने दी गई प्रस्तुति में डा. सदाना ने जानकारी दी किः

अधिकांश विदेशी गोवंश (हॅालस्टीन, जर्सी, एच एफ आदि) के दूध में ‘बीटा कैसीन ए1’ नामक प्रोटीन पाया जाता है जिससे अनेक असाध्य रोग पैदा होते हैं। पांच रोग होने के स्पष्ट प्रमाण वैज्ञानिकों को मिल चुके हैं –

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