पंचगव्य

गो गव्य ही सर्वोत्तम आहार हैं।

यज्ञ में काम लिया जाने वाला घृत केवल और केवल गो-घृत ही होना चाहिये, तभी देवता उसको ग्रहण करेंगे। बाजारू घृत जो कि चर्बीयुक्त हो सकता है या फिर अन्य पशुओं का घृत जो कि अशुद्ध माना जाता है, देवता नहीं दानव ग्रहण करेंगे। उससे देव शक्ति की बजाय दानवी शक्ति का पोषण होगा। परिणाम हमारे लिये निश्चित उल्टा ही होगा। अतः यज्ञ में केवल गो-गव्यों का ही प्रयोग करना चाहिये। शास्त्र विरुद्ध किया गया कार्य पूरी सृष्टि के लिये हानिकारक होता है। शास्त्र में जहाँ भी दूध, दही, छाछ, मक्खन, घृत आदि उल्लेख किया गया है वो केवल गाय के गव्य ही हैं, क्योंकि उस समय भैंस, जर्सी, हॉलिस्टीयन जैसे पशुओं का व्यवहार कहीं भी

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‘‘चरक संहिता’’ में गाय के दूध के १० गुण बताये गये हैं

गाय से प्राप्त पदार्थों की महत्ता

आयुर्वेद में बताया गया है कि ‘‘गाय के दूध में विविध प्रकार के १०१ पदार्थ होते हैं जिनमें १९ प्रकार के स्नेहाल्म (फेटीओसड) हैं, ६ विटामिन, ८ क्रियाशील रस, २५ खनिज, १ शक्कर, ५ फास्फेट,१४ नाइट्रोजन पदार्थ हैं। इसमें २०% मक्खन होता है तथा कैल्शियम होता है जो हड्डियोें को मजबूत कर उसके क्षय को रोकता है। विटामिन तथा जैविक प्रोटीन भी खूब होता है,जिससे प्रक्रिया स्वाभाविक गति से चलती है। इस प्रकार गोदुग्ध पूर्ण आहार है।’’

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गौमूत्र के लाभ 

गौमूत्र के लाभ 
  • कब्ज को दूर करता है – गोमूत्र को साफ कपडे में छान कर पीने से कब्ज जैसी बीमारियों को दूर किया जा सकता है |
  • खुजली – यदि आप खुजली जैसी बीमारियों से परेसान है तो गोमूत्र से मालिश यह फिर गोमूत्र से स्नान करे ऐसा करने से आप के शरीर से खुजली की परेशानी दूर हो जाएगी|
  • दाद – धतूरे के पत्ती को पिस कर इसे गोमूत्र में गाढ़ा होने तक उबल ले | अब इसे ठंडे होने के बाद दादा में लग कर कुछ देर सूखने के बाद साफ पानी से धो ले | इस प्रक्रिया को हफ्ते में दो बार करने सेदाद से जल्द छुटकारा मिलता है |
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