gauparivar's blog

गावो भगो गावः इन्द्रो म इच्छाद्रावः सोमस्य प्रथमस्य भक्षः

गावो भगो गावः इन्द्रो म इच्छाद्रावः सोमस्य प्रथमस्य भक्षः

वेदों में गाय का महत्व अतुलनीय व श्रेष्ठतम है। गाय रुद्रों की माता, वसओं की पुत्री, अदिति पुत्रों की बहन तथा अमृत का खजाना है। अथर्ववेद के 21वें सूक्त को गौ सूक्त कहा जाता है। इस सूक्त के ऋषि ब्रह्मा तथा देवता गऊ है। गायें हमारी भौतिक व आध्यात्मिक उन्नति के प्रधान साधन है। मनुष्य को धन–बल–अन्न व यश पाने के लिए गऊ सूक्त का रोज़ पाठ करना चाहिए। आरोग्य व पराक्रम पाने के लिए गाय के दूध, मक्खन व घी का सेवन करने से पूर्व इस सूक्त का पाठ मात्र करने से सर्वारिष्ट शांत होते है।

माता रुद्राणां दुहिता वसूनां स्वसादित्यनाममृत्सय नाभिः।

Blog Category: 

शिव का वाहन - धर्म अवतार नंदी

शिव का वाहन - धर्म का अवतार नंदी

वृषभ 'संस्कृत अंग्रेजी शब्द' बैल 'के बराबर है. नंदी बैल भगवान शिव का वाहन है. वैदिक साहित्य में शिव शब्द 'जनता के कल्याण' (लोक कल्याण) का पर्याय है. और बैल लोक कल्याण कर्ता का वाहक है.हमारी कृषि और ग्रामीण परिवहन की 90% अभी भी हमारे बैलों पर निर्भर हैं. बैल इस प्रकार हमारे धर्म के अवतार हैं. वस्तुतः बैल मानव जाति का एक भाई है, और जो आदमी के लिए काम करता है, वह भी कोई पारिश्रमिक बिना, 3 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद बछड़ा, बछिया, और एक बैल, जो अपने जीवन प्रर्यंत मानव जाति का कार्य करता है .

भक्त और गौ माता

एक भक्त और गौ माता

एक भक्त और गौ माता

श्रीमद्भागवत के अनुसार भगवान श्री कृष्ण गायों के समूह के पीछे पीछे चलते थे .

इस पर एक भक्त ने गौ माता से इस प्रकार पूंछा-

भक्त - 
गोमाता ! तुम अपने ईष्ट देव के आगे आगे क्यों चलती हो ?
उनके तो पीछे पीछे चलने का विधान है.

गौ - 
आप भूल कर रहे हो अधिष्ठान तो सदा पीछे ही रहता है.
भगवान मेरे ईष्ट और संरक्षक है ,
उनके द्वारा संरक्षित हम अपने गंतव्य स्थान पर बिना किसी भय और संकोच के शीघ्र पहुँच जाती है तो मैया हमारा दूध निकालकर उबालकर शीघ्र लाला को पिला देती है.

Pages