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गौशाला शुरू करने पर सरकार देगी अनुदान

गौशाला शुरू करने पर सरकार देगी अनुदान

प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी की मंशा के अनुसार प्रशासन गौ संरक्षण के कार्य में जुटा है। शासन से दिशा निर्देश मिलने के बाद आवारा पशुओं को संरक्षण दिलाने की मुहिम शुरू हो गई है। अवैध कटान को रोकने के लिए शासन ने बड़े स्तर पर जनपद में गौशाला खोलने की हिदायत दी है। इसके बाद पशुपालन विभाग लोगों को गौशाला खोलने के लिए प्रेरित करने में लगा है। विभाग के मुताबिक गौशालाओं में आने वाली गायों की देखरेख के लिए पशुपालन विभाग के माध्यम से शासन, गौशाला संचालकों को अनुदान देगा। गौशाला खोलने के इच्छुक लोग विकास भवन स्थित मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से आवेदन पत्र लेकर गौशाला पंजीकरण कराने के लि

गाय के सिंग भी होते हैं चमत्कारी

गाय के सिंग भी होते हैं चमत्कारी

गाय को शास्त्रों में माता का स्थान दिया गया है। गाय की सेवा करने के कारण भगवान श्री कृष्ण गोपाल कहे जाते हैं। शास्त्रों में तो यह भी कहा गया है कि शिवलोक, बैकुण्ठ लोक, ब्रह्मलोक, देवलोक, पितृलोक की भांति गोलोक भी है। गोलोक के स्वामी भगवान श्री कृष्ण हैं।

गाय का इतना महत्व यूं ही नहीं है। गाय का दूध माता के दूध के समान फायदेमंद माना जाता है इसलिए बच्चों को गाय का दूध पिलाया जाता है। गाय के गोबर से घर आंगन और पूजा स्थान की शुद्घि होती है। आपने देखा होगा कि गोपूजा के दिन लोग गाय के सिंग में तेल और सिंदूर लगाते हैं। कल्याण पत्रिका में इसका वैज्ञानिक कारण बतया गया है है।

गौशाला स्थान स्थान पर होनी चाहिए

गौशाला स्थान

सर्व प्रथम गौ हत्या बंद होनी चाहिए और गौशालाये स्थान स्थान पर होनी चाहिए, गौ माता का महत्व सभी को बताना चाहिए के किस प्रकार गौ का महत्व हमारे जीवन में है। गौ संरक्षण होना चाहिए और सिर्फ भारतीय नसल की ही गायो का घी, ढूध और अन्य उत्पादों का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि जर्सी, अमेरिकन और अन्य नसल की गाये, गायें नहीं है इन नस्लों के उत्पाद विष के सामान है जो हमारी पीढयो को खोखला कर रहे है। गायो के लिए शोध संस्थान बनाने चाहिए।

दिव्य गुणों की स्वामिनी गौ माता 

दिव्य गुणों की स्वामिनी गौ माता 

दिव्य गुणों की स्वामिनी गौ माता | गौ या गाय हमारी संस्कृति की प्राण है। यह गंगा, गायत्री, गीता, गोव‌र्द्धन और गोविंद की तरह पूज्य है। शास्त्रों में कहा गया है-मातर: सर्वभूतानांगाव:, यानी गाय समस्त प्राणियों की माता है। इसी कारण आर्य-संस्कृति में पनपे शैव, शाक्त, वैष्णव, गाणपत्य, जैन, बौद्ध, सिख आदि सभी धर्म-संप्रदायों में उपासना एवं कर्मकांड की पद्धतियों में भिन्नता होने पर भी वे सब गौ के प्रति आदर भाव रखते हैं। हम गाय को गोमाता कहकर संबोधित करते हैं।

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