gauparivar's blog

क्या आप जानते हैं गो सेवा करने के क्या- क्या लाभ हैं-

क्या आप जानते हैं गो सेवा करने के क्या- क्या लाभ हैं-

जहां गाय बैठती है, वहां की भूमि पवित्र होती है । गाय के चरणों की धूली भी पवित्र होती है। क्या आप जानते हैं गो सेवा करने के क्या-
क्या लाभ हैं-
1. भगवत्प्रेम की प्राप्ति होती है।
2. जन्म-मरण से मुक्ति मिलती है।
3. संतोष मिलता है।
4. धन में वृद्धि होती है।
5. पुण्य की प्राप्ति होती है।
6. संतान की प्राप्ति होती है।
7. दु:ख दर्द दूर होते हैं।
8. ताप-संताप दूर होते हैं।
9. हृदय प्रफुलिलत होता है।
10. मन को शान्ति मिलती है।
11. स्वास्थ्य लाभ होता है।
12. तृप्ति का अनुभव होता है।
13. मनुष्य जनम सफल होता है।

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33 प्रकार के देवताओं का वास गौमाता में है।

33 प्रकार के देवताओं का वास गौमाता में है।

33 प्रकार के देवताओं का वास गौमाता में है। प्राण, अपान, समान, उदान, व्यान, नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त, धनंजय ये 10 प्राण एवं ग्यारहवां जीवात्मा ये ही एकादश रुद्र हैं। ये जब शरीर से निकल जाते हैं, तो प्राणी रुदन करते हैं। गौ इन रुद्रों की माता कही जाती है क्योंकि हमारे शरीर के 10 प्राण एवं जीवात्मा की पुष्टि गौ दुग्ध से होती है। पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश, सूर्य, चंद्र, तारे ये आठ वसु हैं और समस्त संसार इनमें ही बसा हुआ है। गौ माता इनकी दुहिता है। सूर्य चिकित्सा में वैद्य या हकीम अलग-अलग रंगों की बोतलों में पानी भरकर धूप में रख देते हैं और उनसे मरीजों का इलाज करते हैं। हर रंग की बोतल में स

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पहली रोटी गाय को खिलाएं, क्योंकि........

पहली रोटी गाय को खिलाएं, क्योंकि........

गाय हिंदु धर्म में पवित्र और पूजनीय मानी गई है। शास्त्रों के अनुसार गौसेवा के पुण्य का प्रभाव कई जन्मों तक बना रहता है। इसीलिए गाय की सेवा करने की बात कही जाती है। पुराने समय से ही गौसेवा को धर्म के साथ ...ही जोड़ा गया है। गौसेवा भी धर्म का ही अंग है। गाय को हमारी माता बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि गाय में हमारे सभी देवी-देवता निवास करते हैं। इसी वजह से मात्र गाय की सेवा से ही भगवान प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के साथ ही गौमाता की भी पूजा की जाती है।

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गौ माता गौ माता की अद्भुत महिमा

गौ माता गौ माता की अद्भुत महिमा

गौ माता गौ माता की अद्भुत महिमा 
गौ माता

गौ माता की अद्भुत महिमा

महामहिमामयी गौ हमारी माता है उनकी बड़ी ही महिमा है वह सभी प्रकार से पूज्य है गौमाता की रक्षा और सेवा से बढकर कोई दूसरा महान पुण्य नहीं है .

१. गौमाता को कभी भूलकर भी भैस बकरी आदि पशुओ की भाति साधारण नहीं समझना चाहिये गौ के शरीर में "३३ करोड़ देवी देवताओ" का वास होता है. गौमाता श्री कृष्ण की परमराध्या है, वे भाव सागर से पार लगाने वाली है.

२. गौ को अपने घर में रखकर तन-मन-धन से सेवा करनी चाहिये, ऐसा कहा गया है जो तन-मन-धन से गौ की सेवा करता है. तो गौ उसकी सारी मनोकामनाएँ पूरी करती है.

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