Blog

आदि काल से भारत वर्ष में गाय को माता के समान माना जाता है। गाय को मां समझ कर उसकी सेवा की जाती है। गाय वास्तव में सारे जगत की माता है। ‘मातरः सर्व भूतानाम गावः सर्व फल प्रदाम’ वह धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के साथ-साथ और भी कोई फल है तो भी प्रदान करती है।

चरणामृत की महत्ता, उसके औषधीय गुण एवं ग्रहण करने के नियम

मित्रों, मन्दिर अर्थात जहाँ बेचैन मन भी स्थिर हो जाय उसे मन्दिर कहते हैं । जहाँ दुनियाँ के हर प्रकार की समस्याओं का समाधान मिले उसे मन्दिर कहते हैं । मन्दिर जहाँ केवल और केवल पोजिटिविटी अथवा सकारात्मकता अर्थात सकारात्मक उर्जा ही कण-कण में प्रवाहित हो रही हो उसे मन्दिर कहते हैं ।।
 

परम पूज्य व पाप हारिणी गौ गंगा और गीता हैं

इस हिन्दोस्तां के माटी की महिमा अपरम्पार है
गौ गंगा गीता से निर्मित इसका श्यामल सार है

परम पूज्य व पाप हारिणी गौ गंगा और गीता हैं
तरण तारिणी मोक्ष दायिनी तीनो परम पुनीता हैं

रोम रोम में देव रमे हों ऐसी पवित्र गौ माता है
चार धाम का पुण्य भी गौ सेवा से मिल जाता है

जो जन इसकी सेवा करते भव सागर तर जाते हैं
वेद पुराण उपनिषद भी इसकी महिमा बतलाते हैं

सकल पदारथ दूध दही घी औषधि गुणकारक हैं
स्वस्थ प्रदायक मंगलकारक समूल रोग निवारक हैं

भगवान कृष्ण ग्वालों संग खुद भी गायें चराते थे
बछड़ों के संग क्रीड़ा करते दूध दही घी खाते थे

एस्गर क्रिसटेंसन ने जब पशुपालन शुरू किया था तो डेनमार्क में 40 हजार पशुपालक थे. आज उनकी संख्या महज 3000 रह गई है.

दुनियाभर में डेयरी उद्योग को हाल के वर्षों में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

रिटेल क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के आने से कई देशों में दूध के थोक भाव में कमी आई है और छोटे उत्पादकों के लिए रोजी रोटी का जुगाड़ करना भारी पड़ रहा है. अमरीका में दुग्ध उत्पादों की बिक्री में कमी से भी इंडस्ट्री प्रभावित हुई है.

इसकी मदद से आप देख सकते हैं कि गाय कितनी देर बैठी रहती है, कितने घंटे सोती है, कितनी देर भटकती है और वो कैसा महसूस कर रही है

गाय का आध्यात्मिक महत्वः

गाय का विश्व स्तर पर आध्यात्मिक महत्व है, ''गावो विश्वस्य मातरः''। नवग्रहों सूर्य, चंद्रमा, मंगल, राहु, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, केतु के साथ साथ वरूण, वायु आदि देवताओं को यज्ञ में दी हुई प्रत्येक आहुति गाय के घी से देने की परंपरा है, जिससे सूर्य की किरणों को विशेष ऊर्जा मिलती है। यही विशेष ऊर्जा वर्षा का कारण बनती है, और वर्षा से ही अन्न, पेड़-पौधों आदि को जीवन प्राप्त होता है। हिंदू धर्म में जितने धार्मिक कार्य, धार्मिक संस्कार होते हैं जैसे नामकरण, गर्भाधान, जन्म आदि सभी में गाय का दूध, गोबर, घी, आदि का ही प्रयोग किया जाता है जहां विवाह संस्कार आदि होते हैं वहां भी गोबर के लेप से शुद्धि

Pages