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गोलासन ग्राम में स्थित विश्व की सबसे बड़ी नंदीशाला श्री हनुमान महावीर गोशाला को लेकर मंगलवार को एक बड़ा मोड़ आया है। पूर्व में चला रही नंदीशाला की ट्रस्ट ने 6 नवंबर को अतिक्रमण के विवाद को लेकर चाबी प्रशासन को सौप दी थी। जिसके बाद से प्रशासन् नदीशाला को चलाता आ रहा था। वही 17 नवंबर को नंदीशाला चलाने के लिए ग्रामीणों ने  गोपालन मंत्री ओटाराम देवासी सहित जिले के जनप्रतिनिधि व अधिकारियों की मौजूदगी में लिखित में दिया था कि हम 20 ग्रामीणों की कमेटी बनाकर गोशाला को चलायेंगे। जिसपर उन्होंने पांच दिन का समय मांगा। वही सोमवार को तहसीलदार ने नंदीशाला में रखे संसाधन की सुचिबंध बनाकर मंगलवार को सोपने की

भारतीय गाय को तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है।

पहले वर्ग : इसमें वे गाएँ आती हैं जो दूध तो खूब देती हैं, लेकिन उनकी संतान कृषि में अनुपयोगी होती है।

दूसरे वर्ग  :इसमें वे गाएँ आती हैं जो दूध कम देती हैं किंतु उनके बछड़े कृषि और गाड़ी खींचने के काम आते हैं।

तीसरे वर्ग :कुछ गाएँ दूध भी प्रचुर देती हैं और उनके बछड़े भी कर्मठ होते हैं। ऐसी गायों को सर्वांगी नस्ल की गाय कहते हैं।

नोएडा। सुप्रसिद्घ गौ-भक्त और सन्यासी स्वामी विश्वासानंद का कहना है कि दूध न देती गाय भी हमारे लिए कमाई का अच्छा साधन बन सकती है। यहां सुदर्शन न्यूज चैनल के सुदर्शन गो संसद की बैठक में ‘उगता भारत’ के मुख्य संपादक राकेश कुमार आर्य के साथ उन्होंने विशेष बातचीत में बताया कि हम गौमय-दंत मंजन बनाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। स्वामीजी ने यूं तो कई चीजें बताईं लेकिन हम यहां आज अपने पाठकों के लिए गौ-दंत मंजन के विषय में ही बताते हैं।

भागवत कथा में आरती उतारते मुस्लिम भाई

गुना। मध्यप्रदेश के गुना जिले के कुछ मुसलमानों में एकता की अनूठी मिसाल पेश की है। जिले का बरसत गांव आज नशे का गढ़ बन चुका है तो वहीं दूसरी और बरसत गांव में इन दिनों श्री मद्भागवत ज्ञान गंगा की अमृत वर्षा हो रही है।

कुछ दिनों पहले की घटना है, हमेशा की तरह सुबह जागते ही मैं थोड़ी देर बालकोनी में बैठकर प्राकृतिक दृश्य हरे-भरे पेड़-पौधों को निहार रही थी, तभी पड़ोस की चाची जी को देखा कि वो एक गाय जो उनके घर के सामने लगाये गए सब्जियों और फूल-पौधों के बाग़ में घुसकर पौधों को खा गई थी उसे भगा रहीं थी| जब ध्यान दिया तो पता चला कि वो गाय को गन्दी गालियाँ दे-देकर कोस रहीं थीं, फिर वो गाय को भगाने के लिए उसे डंडे से मारे लगीं| मैं जल्दी से उनके पास गई और डंडा उनके हाथ से ले लिया कहा- “चाची जी मत मारिये गाय को मारना पाप होता है और गाली देना तो अपनी माँ को गाली देने जैसा है|” अब वो मुझ पर ही बिफर पड़ी

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