Aksh's blog

एक गाय, पांच एकड़ खेती

एक गाय, पांच एकड़ खेती

हींग लगे न फिटकरी, रंग चढ़े चोखा। शून्य लागत पर प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए यह कहावत सच साबित हो रही है। बिना रासायनिक खाद व कीटनाशक के प्रयोग के सिर्फ गोबर व गोमूत्र के प्रयोग से अनाज व सब्जी का अधिक उत्पादन मिलने लगा है। अपने पास अगर एक गाय है, तो पांच एकड़ तक खेती के लिए खाद की चिंता नहीं रहेगी। बस गोबर और गुड़ से ही फसल लहलहाएगी। गुणवत्तापूर्ण अधिक उत्पादन भी मिलेगा।

गाय का दूध गुणों का भण्डार हैं

गाय का दूध गुणों का भण्डार हैं

इस दूध से अनेक बीमारिया सही होती हैं, जिन कारणों से ही भारत के लोगो में गाय के प्रति अपार स्नेह श्रद्धा और मातृत्व भाव होता हैं। आज हम जानेंगे के दूध के ऐसे अनजाने गुण जो हमने कभी सुने ही नहीं थे और जिन वजहों से ये अमृत तुल्य हैं।

जीवन भर गाय का दूध पीने वाले व्यक्ति कैंसर जैसे भयानक रोगो से बचे रहते हैं। इसका दूध निरंतर सेवन करने से हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति इतनी बढ़ जाती हैं के कोई रोग नज़दीक नहीं फटकता। चाहे वो सर्दी खांसी हो, हृदय रोग हो, पेट के रोग, पुरुषो के रोग हो या स्त्रियों के रोग हो।

गाय के दूध में सोना।

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कृषि क्षेत्र में गोबर व गोमूत्र का आर्थिक महत्त्व

कृषि क्षेत्र में गोबर व गोमूत्र का आर्थिक महत्त्व

वास्तविकता यह है कि भारतीय प्राचीन ग्रन्थों के रचनाकार स्वयं में महान दूरदर्शी वैज्ञानिक थे। अपने ज्ञान के आधार पर उन्होंने सामान्य व साधारण नियम-कानून एक धार्मिक क्रिया के रूप में समाज के सामने प्रस्तुत किये ताकि मानव समाज पीढ़ी-दर-पीढ़ी उनके वैज्ञानिक ज्ञान व अनुभवों का लाभ उठते हुए प्राकृतिक पर्यावरण को बिना हानि पहुँचाए एक स्वस्थ जीवन बिता सके।

गाय को भारत में ‘माता’ का स्थान प्राप्त है। भारत के कई प्राचीन ग्रन्थों में अनेक स्थानों पर पढ़ने को मिलता है कि ‘गोबर में लक्ष्मीजी का वास होता है’। यह कथन मात्र ‘शास्त्र’ वचन नहीं है यह एक वैज्ञानिक सत्य है।

गायों के मूत्र में पाया गया सोना

गायों के मूत्र में पाया गया सोना

मेरे देश की धरती सोना उगले, अब तक यह गीत गुनगुनाते आए हैं, लेकिन अब मेरे देश की गायें सोना उगले गाएंगे तो भी कुछ गलत नहीं होगा। एक शोध में गुजरात की गिर गायों के मूत्र में सोना पाया गया है। गोमूत्र में 388 प्रकार के रोग प्रतिरोधक तत्व भी पाए गए हैं।

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