Skahore's blog

जीण घर में गाय रे गौबर रो गारों

देसी गाय का गोबर है महाऔषधी- हमारे देश में प्राचीन काल से ही गाय को माता का पवित्र स्थान दिया गया है. और बड़े-बड़े रिसर्च में भी गाय की हर चीज को महाँ औषधी के रूप में प्रमाणित कर दिया गया है. गौमाता किसी बड़े औषधालय से कम नहीं है । इसमें अनेकों गुण कूट-कूट के भरे हुए हैं. इसका दूध, गोबर, मूत्र सभी बहुत ही उपयोगी है. और इनसे बहुत सी दवाएं तैयार होती हैं.

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गोरक्षा हमारा परम कत्र्तव्य, गोमाता सुखी तो विश्व सुखी

॥ श्रीसुरभ्यै नम:॥ गावो विश्वस्य मातर:॥

॥ अति महत्वपूर्ण बिन्दु॥

गोघातियों एवं गो- अपराधियों का परोक्ष- अपरोक्ष समर्थन करना भी गोघातरूपी महापाप ही है। इस सम्बन्ध में शास्त्रों द्वारा उल्लेखित बिन्दु-

(01.)जो मूर्ख लोग, गोवंश को डॉटते तथा मारते- पीटते है वे गौओं के दु:खपूर्ण नि:श्वास से पीङित होकर घोर नरकाग्नि में पकाये जाते है। (यदि कोई मारने वाली गोमाता घर में आ गयी है तो) उससे सूखे पलाश के डंडे से हटा दें और उससे यह कहें कि तुम डरो मत, वापस चली जाओ।

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गो, गोपाल, गोधरा-पृथ्वी

इस वैज्ञानिक युग में घोर अवैज्ञानिक मतिभ्रम फेेला हुआ है। तभी तो नास्तिकता, हिंसा स्वार्थ लोलुपता आदि अवगुणों को अधिकाधिक प्रश्रय मिल रहा है। मानवता पथभ्रष्ट हो गयी है। मनुष्य का मस्तिष्क और शरीर दोनों विकृत  से प्रतीत हो रहे है। यही कारण है कि विज्ञान के अंधभक्त प्राय: धर्म के नाम से चिढ़ते हैं और विज्ञान का नाम सुनकर धर्म के पैर उखड़ जाते हैं ऐसा कहते हुए भी सुने जाते हैं। यह तो धर्म का उपहास करने वालों का असंगत प्रलाप है। इस धर्मप्राण भारतभूमि में इस प्रकार की उक्ति का उच्चार और व्यवहार दोनों ही अनुचित हैं। इसमें भी संदेह नही किधर्म को प्राण मानने वाली आर्य जाति के कतिपय आचार विचार भी दम

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गोवंश विनाश का एक और आयाम

* वैटनरी वैज्ञानिकों को सिखाया-पढाया गया है कि पोषक आहार की कमी से गऊएं बांझ बन रही हैं। वैग्यानिकों का यह कहना आंशिक रूप से सही हो सकता है पर लगता है कि यह अधूरा सच है। इसे पूरी तरह सही न मानने के अनेक सशक्त कारण हैं।

* बहुत से लोग अब मानने लगे हैं कि शायद करोडों गऊओं के बांझ बनने का प्रमुख  कारण कृत्रिम गर्भाधान है ?

* संन्देह यह भी है कि कहीं न्यूट्रीशन को बांझपन का प्रमुख कारण बताकर बांझपन के वास्तविक कारणों को छुपाया तो नहीं जा रहा ?

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