Skahore's blog

आस्था की दृष्टि से देखा जाना चाहिए गाय को : पूज्य श्री गोपाल मणिजी

देश के 375 जिल्लो में गौमाता का प्रचार करते हुए बस्तर पहुचे गौक्रांति अग्रदूत गोपाल मणिजी जी ने रविवार को चेंबर सभागार में धेनु मानस गोकथा कही । उन्होंने गाय को हिन्दुओ की आस्था का प्रतीक बताते हुए कहा कि सरकार गाय को माता नही मानती। वह आंदोलन की भाषा समझती है और हमे लोगो में जनजागरण करना है । गाय को आस्था की दृष्टि से देखा जाना चाहिए । गाय को बचाने के लिए देश में अलग से गौ मंत्रालय हो । और विधालयो में 10 साल तक के बच्चो को गाय का दूध देना अनिवार्य किया जाए । आखिल भारतीय गौ रक्षा द्वारा आयोजित गौ प्रतिष्ठा भारत यात्रा के तहत पूज्य गोपाल मणिजी का बस्तर 376 वा पड़ाव है । धेनुमानस गौ कथा के संद

विजयवाडा में धेनु मानस गौ कथा आयोजित 

गोमाता

विजयवाडा 20 फरवरी ( पर्वत शर्मा ) स्थानीय वनटाउन स्थित श्री सुखदेव  राठी महेश्वरी भवन में गत रात्रि श्री गौमाता गौ सेवा ट्रस्ट द्वारा धेनुमानस गौ कथा का आयोजन किया गया । गत 9 मई 2016 को गंगोत्री से यात्रा प्रारम्भ कर 365वे जिले( कृष्णा ) विजयवाडा में पधारे श्री गोपाल मणिजी महाराज ने कथा सुनाई ,उन्होंने कथा में गौमाता से जुड़े अनेक फायदे बताते हुए कहा की " गौमाता के बोलने से जो माँ की आवाज निकलती है उनको सुनने से कान का बहरापन ठीक हो जाता है और माँ ध्वनि मंदिरो में घण्टी बजाने का काम करती है। गौ कथा में सरकार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली की भारत सरकार गाय को गौमात

गाय बची तो ही देश बचेगा, सभ्यता बचेगी

भारत की संस्कृति, समृद्वि और सभ्यता का आधार गंगा, गौ, गायत्री, गीता और गुरु ही रही है।

भारत की संस्कृति प्रकृति मूलक संस्कृति है। दुनिया के

प्राचीनतम ग्रन्थ वेदो में कण-कण के प्रति अहोभाव कीh अभिव्यक्ति है। हमने सूर्य-चन्द्र, ग्रह नक्षत्र, पशु-पक्षी, जीव-जन्तु, पेड़-पौधों को पूज्य माना है। प्रकृति का कण-कण हमें देता है। इसीलिए कण-कण में देवाताओं का निवास माना है।

गाय की पूरी शारीरिक संरचना विज्ञान पर आधारित है ; जानें कैसे ??

गाय , ऋषिमुनि , विज्ञानं , गौवंस

हम बीमार क्यों होते हैं इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है कि हमारा शरीर पंचभूतों से निर्मित है। मानव के अतिरिक्त मानव उपयोगी समस्त जीवों का भी शरीर भी पंचभूतों से ही निर्मित है । वर्तमान चिकित्सा पद्धतियाँ आज के समय रासायनिक तरीकों से चिकित्सा करती हैं , उन्हें पंचभूत को संतुलित करने का कोई ज्ञान नहीं है । आज के समय मानव निर्मित सारे पंचभूत चाहे वह मिट्टी हो , जल हो , वायु हो , अग्नि हो या आकाश हो सब कुछ दूषित हो चुका है ।

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