गाय के घी का रोग पर उपयोग-

गाय के घी का रोग पर उपयोग-

1.    गाय के घी से बल और वीर्य बढ़ता है और शारीरिक व मानसिक ताकत में भी इजाफा होता है-
2.    गाय का घी नाक में डालने से कोमा से बहार निकल कर चेतना वापस लोट आती है-गाय का घी नाक में डालने से पागलपन दूर होता है गाय का घी नाक में डालने से एलर्जी खत्म हो जाती है-
3.    आयुर्वेद विशेषज्ञो के अनुसार अनिद्रा का रोगी शाम को दोनों नथुनो में गाय के घी की दो-दो बूंद डाले और रात को नाभि और पैर के तलुओ में गौघृत लगाकर लेट जाय तो उसे प्रगाढ़ निद्रा आ जायेगी-

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जब कैंसर हो जाएगा, तभी गाय माता की याद आएगी ?

जब कैंसर हो जाएगा, तभी गाय माता की याद आएगी ?

पुराणों के अनुसार गौएं साक्षात विष्णु रूप है, गौएं सर्व वेदमयी और वेद गौमय है। भगवान श्रीकृष्ण को कृष्ण अवतार में सारा ज्ञानकोष गो चारण से ही प्राप्त हुआ था।
गुजरात के बलसाड़ नामक स्थान के निकट cancer (कैंसर) अस्पताल में 3 हजार से अधिक कैंसर रोगियों का इलाज पंचगव्य से हो चुका है ! अकेले एक मात्र गाय माता इन्सान की लगभग हर जरूरत और हर समस्या की समाधान हैं !

इस्लाम धर्म में गाय का महत्व——-

देश में विद्वेषपूर्ण और भ्रमक प्रचार किया जाता हैं कि इस्लाम गौवध कि इजाजत देता हैं | किन्तु ऐसा नहीं हैं निम्नलिखित उदाहरणों व तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट होता हैं कि इस्लाम व पैगम्बर साहब सदा गाय को आदर की नजर से देखते थे |
——( बेगम हजरत आयशा में ) हजरत मों. साहब लिखते हैं कि गाय का दूध बदन की ख़ूबसूरती और तंदुरुस्ती बढाने का बड़ा जरिया हैं |
—–(नासिहते हाद्रो) हजरत मों. साहब लिखते हैं कि गाय का दूध और घी तंदुरुस्ती के लिए बहुत जरूरी हैं | और उसका मांस बीमारी पैदा करता हैं | जबकि उसका दूध भी दवा हैं |

घर घर में गोपालन हो

घर घर में गोपालन हो । अपने हाथ से गोसेवा करने का सौभाग्य हर परिवार को प्राप्त हो । प्रत्यक्ष जिनके भाग्य में यह गोसेवा नहीं वे रोज गोमाता का दर्शन तो करें । मन ही मन पूजन, प्रार्थना करें व प्रतिदिन अपनी आय का कुछ भाग इस हेतु दान करें । किसी ना किसी रूप में गाय हमारे प्रतिदिन के चिंतन, मनन व कार्य का हिस्सा बनें । यही मानवता की रक्षा का एकमात्र उपाय है ।

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