कलियुग और गौमाता

कलियुग और गौमाता

गौमाता को एक ग्रास खिला दीजिए तो वह सभी देवी-देवताओं को पहुँच जाएगा । इसीलिए धर्मग्रंथ बताते हैं समस्त देवी-देवताओं एवं पितरों को एक साथ प्रसन्न करना हो तो गौभक्ति-गोसेवा से बढ़कर कोई अनुष्ठान नहीं है ।

भविष्य पुराण में लिखा है गौमाता के पृष्ठदेश में ब्रह्म का वास है, गले में विष्णु का, मुख में रुद्र का, मध्य में समस्त देवताओं और रोमकूपों में महर्षिगण, पूँछ में अन्नत नाग, खूरों में समस्त पर्वत, गौमूत्र में गंगादि नदियाँ, गौमय में लक्ष्मी और नेत्रों में सूर्य-चन्द्र हैं ।

भगवान भी जब अवतार लेते हैं तो कहते हैं-
【‘विप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार।‘】

गाय तो भगवान की भगवान है

गाय तो भगवान की भगवान है

उपनिषद्, महाभारत,चरकसंहिता,अष्टंागहृदय,भावप्रकाश,निघंटु,आर्यभिषेक,आिद ग्रंथों  में तथा विज्ञान और साहित्य में गाय के दूध की महिमा गाई गई है ।

1२.गाय तो भगवान की भगवान है, भूलोक पर गाय सर्वश्रेष्ठ प्राणी है ।

1३.दूध जैसा पौष्टिक और अत्यन्त गुण वाला ऐसा अन्य कोई पदार्थ नहीं है ।दूध जो मृत्युलोक का अमृत है ।सभी दूधों में अपनी माँ का दूध श्रेष्ठ है,और माँ  का दूध कम पड़ा तो वहाँ से गाय का दूध बच्चों  के लिए अमृत सिद्ध हुआ है ।

1४.गौदु््ग्ध मृत्युलोक का अमृत है मनुष्यों के लिए । शक्तिवर्धक,रोगप्रतिरोधक,रोगनाशक तथा गौदुग्ध जैसा दिव्य पदार्थ त्रिभुवन में भी अजन्मा है ।

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गाय की हर एक चीज़ गुणकारी एवम सर्वोत्तम है

गाय की हर एक चीज़ गुणकारी एवम सर्वोत्तम है

गाय की हर एक चीज़ गुणकारी एवम सर्वोत्तम है । गाय के गोबर को अतिशुद्ध माना जाता है। प्राचीन समय में घर को शुद्ध करने के लिए गाय के गोबर से घर लिपे जाते थे। आज भी दूर-दराज़ के गावों में यह कार्य जस का तस चल रहा है।

गौमूत्र (गाय के मूत्र) को भी घर में शुद्धी के लिए छिड़का जाता है तथा शुद्ध गौमूत्र के सेवन से पेट के विभिन्न रोगों से निजात मिलती है। छोटे शिशु को गाय का दूध पिलाने से उसका बौद्धिक विकास तीव्र गति से होता है।

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परमेश्वर के शब्द गौमाता के प्रति इस रूप में प्रकट हुए हैं

परमेश्वर के शब्द गौमाता के प्रति इस रूप में प्रकट हुए हैं

माता रुद्राणाम् दुहिता वसुनाम् स्वसादित्यानाममृतस्य नाभि:। 

प्रनु वोचं चिकितुषे जनाय मा गामनागामदितिम् वधिष्ट 

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