गौ सवर्धन और कृषि ...

गौ सवर्धन और कृषि ...

वैदिक काल में समद्ध खेती का मुख्य कारण कृषि का गौ आधारित होना था। प्रत्येक घर में गोपालन एवं पंचगव्य आधारित कृषि होती थी, तब हम विश्व गुरू के स्थान पर थे। भारतीय मनीषियों ने संपूर्ण गौवंश को मानव के अस्तित्व, रक्षण, पोषण, विकास एवं संवध्र्रन के लिये आवश्यक समझा और ऐसी व्यवस्थाऐं विकसित की थी जिसमें जन मानस को विशिष्ट शक्ति बल तथा सात्विक वृद्धि प्रदान करने हेतु गौ दुग्ध, खेती के पोषण हेतु गोबर-गौमूत्र युक्त खाद, कृषि कार्याे एवं भार वहन हेतु बैल तथा ग्रामद्योग के अंतर्गत पंचगव्यों का घर-घर में उत्पादन किया जाता था। प्राचीन काल से ही गोपालन भारतीय जीवन शैली व अंर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग रहा

खेती में गाय और केंचुए को लेकर चल रही है खींचतान

कपड़े का मशहूर ब्रांड गैप समाज और कारोबार में बढ़त पाने की खातिर गोबर पर आधारित प्राकृतिक खेती का समर्थन कर रहा है। यही वजह है कि भारत में गायों की संख्या कम होने से गैप चिंतित है।

इस ब्रांड का ऑर्गेनिक फार्मिंग यानी जैविक खेती के समर्थकों से वैचारिक टकराव चल रहा है। कंपनी का मानना है कि अगर उसे अपने ब्रांड के लिए समाज में एक निश्चित मुकाम दिलानी है तो इसका सबसे बढ़िया तरीका है कि प्राकृतिक खेती का समर्थन किया जाए। इस तरह की खेती के लिए गाय का गोबर और गोमूत्र बहुत ही जरूरी तत्त्व हैं।

गौरक्षा के लिए 250 किमी की पैदल यात्रा, अब करेंगे अनशन

गौरक्षा के लिए 250 किमी की पैदल यात्रा, अब करेंगे अनशन

बुंदेलखंड में भूख से दम तोड़ रही लाखों गाय को बचाने के लिए इस भीषण गर्मी के मौसम में सरकार ने अब तक किसी तरह की कोई पहल नहीं की है। सरकार तक गौवंश की इस दुर्दशा की तस्वीर पहुंचाने के मकसद से बुंदेलखंड के सामाजिक कार्यकर्ता तारा पाटकर दस दिनों की पैदल यात्रा कर लखनऊ पहुंचे। पाटकर ने महोबा से 5 जून को गौरक्षा पदयात्रा शुरू की थी और 15 जून को लखनऊ पहुंचे। यहाँ उन्होंने ऐलान किया कि 16 जून से एक सप्ताह की भूख हड़ताल शुरू करेंगे। 

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