कैसे गौशाला से कमाए 3.5 करोड़ रुपये वो भी बिना गाय से दूध लिए?

गौशाला से कमाए

भारत : बिहार चुनाव ही ले लीजिए! गाय छाई रहीं। नेताओं ने भाषणों में धर्म ग्रंथों से उठाए गोधन, कामधेनु, गोवर्धन, गोरक्षा, जननी जैसे शब्द बोल-बोलकर गायों को बूचड़खानों में जाने से रोकने के संकल्प लिए। कैसे रोकेंगे? ये कोई नहीं बता पाया।

गौशाला शुरू करने पर सरकार देगी अनुदान

गौशाला शुरू करने पर सरकार देगी अनुदान

प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी की मंशा के अनुसार प्रशासन गौ संरक्षण के कार्य में जुटा है। शासन से दिशा निर्देश मिलने के बाद आवारा पशुओं को संरक्षण दिलाने की मुहिम शुरू हो गई है। अवैध कटान को रोकने के लिए शासन ने बड़े स्तर पर जनपद में गौशाला खोलने की हिदायत दी है। इसके बाद पशुपालन विभाग लोगों को गौशाला खोलने के लिए प्रेरित करने में लगा है। विभाग के मुताबिक गौशालाओं में आने वाली गायों की देखरेख के लिए पशुपालन विभाग के माध्यम से शासन, गौशाला संचालकों को अनुदान देगा। गौशाला खोलने के इच्छुक लोग विकास भवन स्थित मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से आवेदन पत्र लेकर गौशाला पंजीकरण कराने के लि

गाय के सिंग भी होते हैं चमत्कारी

गाय के सिंग भी होते हैं चमत्कारी

गाय को शास्त्रों में माता का स्थान दिया गया है। गाय की सेवा करने के कारण भगवान श्री कृष्ण गोपाल कहे जाते हैं। शास्त्रों में तो यह भी कहा गया है कि शिवलोक, बैकुण्ठ लोक, ब्रह्मलोक, देवलोक, पितृलोक की भांति गोलोक भी है। गोलोक के स्वामी भगवान श्री कृष्ण हैं।

गाय का इतना महत्व यूं ही नहीं है। गाय का दूध माता के दूध के समान फायदेमंद माना जाता है इसलिए बच्चों को गाय का दूध पिलाया जाता है। गाय के गोबर से घर आंगन और पूजा स्थान की शुद्घि होती है। आपने देखा होगा कि गोपूजा के दिन लोग गाय के सिंग में तेल और सिंदूर लगाते हैं। कल्याण पत्रिका में इसका वैज्ञानिक कारण बतया गया है है।

गोपाअष्ठमी 2017 मुहर्त पूजा विधि ओर महत्व

गोपाष्टमी 2017 : कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी को गोपाष्टमी के त्यौहार रूप में मनाया जाता है गोपाष्टमी का पर्व गोवर्धन पर्वत से जुड़ा त्यौहार है | श्रीकृष्ण ने गौचारण लीला गोपाष्टमी के दिन शुरू की थी। कहा जाता है की द्वापर युग में श्री कृष्ण भगवान ने गोवर्धन पर्वत को कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा को ब्रज वासियों की भारी वर्षा से रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठा लिया था | श्री कृष्ण भगवान की इस लीला से सभी ब्राज़ वासी उस पर्वत के निचे कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से लेकर सप्तमी तक रहे तब जाकर इन्द्र देव को पछतावा हुआ | और इन्द्र देव को वर्षा रोकनी पड़ी | तब से लेकर आज तक गोवर्धन पर्वत

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