आयुर्वेद में गाय के घी को अमृत समान बताया गया है

आयुर्वेद में गाय के घी को अमृत समान बताया गया है

आयुर्वेद में गाय के घी को अमृत समान बताया गया है। हमारे घरों में बहुत से ऐसे लोग हैं जो  वीक्यूजेक्यूएन को नियक़्न्तृत रखने के प्रति सतर्कता  बरतते हैं और  घी को हाथ तक नहीं लगाते। पर अगर गाय के घी को नियमित रूप से अपने भोजन में शामिल किया जाए तो इससे वजन भी नियंत्रित रहता है और किसी भी प्रकार की बीमारी भी नहीं लगती। देशी घी का मतलब है गाय के दूध से बना शुद्ध घी, जो कि एक प्रकार की दवा भी माना जाता है। 

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गोवर्धन पूजा का महत्व और विधि

गोवर्धन पूजा का महत्व और विधि

कार्तिक मास की शुक्लपक्ष की प्रतिपदा को ही गोवर्धन पूजा की जाती है। इसे अन्नकूटए बलि पूजा और मार्गपाली जैसे नामों से भी जाना जाता है। गोवर्धन की पूजा भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से शुरू हुई। वैदिक वाटिका आपको बता रही है कैसे की जाती है गोवर्धन पूजा और इस पूजा से कौन कौन सी समस्याएं दूर होती हैं आपकी।
गोवर्धन पूजा का महत्व और  विधि

गौ सेवा का अनन्त फल

गौ सेवा का अनन्त फल

जो पुरुष गौओ की सेवा और सब प्रकार से उनका अनुगमन करता है |  गौए उसे अत्यन्त दुलर्भ वर प्रदान करती है। गौओ के साथ मनसे भी द्रोह न करे उन्हें  सदा सुख पहुचाए उनका यथोचित सत्कार करे ओर नमस्कार आदि  के द्वारा उनकी पूजा  करे। जो मनुष्य  जितेन्द्रिय और प्रसन्नचित्त  होकर नित्य गौओ की सेवा करता है वह समर्द्धि   का भागी होता है।

कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था में गाय की भूमिका

भारतीय संस्कृति में गाय का महत्व, गायत्री गंगा और गीता से भी बढ़कर है, क्योंकि गायत्री की साधना में कठिन तपस्या अपेक्षित हैं, गंगा के सेवन के लिये भी कुछ त्याग करना ही पड़ता है और गीता को जितनी बार पढ़ोगे उसमें हर बार कुछ न कुछ नया मिलता है, जिसका रहस्य समझना कठिन है, लेकिन गौ का लाभ तो घर बैठे ही मिल जाता है। वेदों का कथन है कि यदि किसी को इस माया राज्य में सब प्रकार का वैभव प्राप्त करना है तो गौ माता की प्रमुख रूप से सेवा करें। यहाँ प्रश्न पैदा होता है कि गौ की महिमा का शास्त्रों में जो वर्णन है, क्या उसे सत्य माना जा सकता है ?

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