कैसे गौशाला से कमाए 3.5 करोड़ रुपये वो भी बिना गाय से दूध लिए?

गौशाला से कमाए

भारत : बिहार चुनाव ही ले लीजिए! गाय छाई रहीं। नेताओं ने भाषणों में धर्म ग्रंथों से उठाए गोधन, कामधेनु, गोवर्धन, गोरक्षा, जननी जैसे शब्द बोल-बोलकर गायों को बूचड़खानों में जाने से रोकने के संकल्प लिए। कैसे रोकेंगे? ये कोई नहीं बता पाया।

गौशाला शुरू करने पर सरकार देगी अनुदान

गौशाला शुरू करने पर सरकार देगी अनुदान

प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी की मंशा के अनुसार प्रशासन गौ संरक्षण के कार्य में जुटा है। शासन से दिशा निर्देश मिलने के बाद आवारा पशुओं को संरक्षण दिलाने की मुहिम शुरू हो गई है। अवैध कटान को रोकने के लिए शासन ने बड़े स्तर पर जनपद में गौशाला खोलने की हिदायत दी है। इसके बाद पशुपालन विभाग लोगों को गौशाला खोलने के लिए प्रेरित करने में लगा है। विभाग के मुताबिक गौशालाओं में आने वाली गायों की देखरेख के लिए पशुपालन विभाग के माध्यम से शासन, गौशाला संचालकों को अनुदान देगा। गौशाला खोलने के इच्छुक लोग विकास भवन स्थित मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से आवेदन पत्र लेकर गौशाला पंजीकरण कराने के लि

गौरक्षा के लिए 250 किमी की पैदल यात्रा, अब करेंगे अनशन

गौरक्षा के लिए 250 किमी की पैदल यात्रा, अब करेंगे अनशन

बुंदेलखंड में भूख से दम तोड़ रही लाखों गाय को बचाने के लिए इस भीषण गर्मी के मौसम में सरकार ने अब तक किसी तरह की कोई पहल नहीं की है। सरकार तक गौवंश की इस दुर्दशा की तस्वीर पहुंचाने के मकसद से बुंदेलखंड के सामाजिक कार्यकर्ता तारा पाटकर दस दिनों की पैदल यात्रा कर लखनऊ पहुंचे। पाटकर ने महोबा से 5 जून को गौरक्षा पदयात्रा शुरू की थी और 15 जून को लखनऊ पहुंचे। यहाँ उन्होंने ऐलान किया कि 16 जून से एक सप्ताह की भूख हड़ताल शुरू करेंगे। 

10 राज्यों में क़ानूनन होती है गो-हत्या

भारत के 29 में से 10 राज्य ऐसे हैं जहां गाय, बछड़ा, बैल, सांड और भैंस को काटने और उनका गोश्त खाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है. बाक़ि 18 राज्यों में गो-हत्या पर पूरी या आंशिक रोक है.

भारत की 80 प्रतिशत से ज़्यादा आबादी हिंदू है जिनमें ज़्यादातर लोग गाय को पूजते हैं. लेकिन ये भी सच है कि दुनियाभर में ‘बीफ़’ का सबसे ज़्यादा निर्यातकरनेवाले देशों में से एक भारत है.

दरअसल ‘बीफ़’, बकरे, मुर्ग़े और मछली के गोश्त से सस्ता होता है. इसी वजह से ये ग़रीब तबक़ों में रोज़ के भोजन का हिस्सा है, ख़ास तौर पर कई मुस्लिम, ईसाई, दलित और आदिवासी जनजातियों के बीच.

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