गोसेवा इतनी की बीवी को भी छोड दिया ,

मुस्लिम युवक की बीवी ने कहा,उसे चुनो या गाय ,उत्तरप्रदेश में एक मुस्लिम को अपनी 14 गायो से इतना प्यार था की उसके लिए अपनी पत्नी को भी छोड़ दिया , मूलरूप से कानपूर देहात के रहने वाले अफक अली उर्फ़ मुन्ना ने बताया की जब उनकी पत्नी ने गायो या पत्नी मेसे किसी एक को चुनने को कहा तो उन्होंने गायो को चुन लिया हालांकि यह कहानी 13 वर्ष पहले की है लेकिन आज जब गौरक्षक समूहों ने बीफ खाने और गायो के मसले पर मुस्लिमो पर निशाना साधा तब अफक ने इस वाकए को साझा किया, वर्ष 2001 में शादी के कुछ दिन बाद ही अफक की बीवी अफरोज उनका फैसला सुनते ही घर छोड़कर चली गयी । पंचायत ने दोनो

जानिये क्यों पास नहीं हुआ आज तक गौहत्या रोकने का कोई बिल ??

माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय मोदी जी से निवेदन है कि अब वे अपनी गौमाता की रक्षा और सेवा के लिए शीघ्राति शीघ्र उपरोक्त बातों को संज्ञान में लेते हुए निश्चय ही ठोस कदम उठायेंगे। अब आपको तय करना है की  गौ ह्त्या रोकने का बिल संसद मे कैसे पास करवाएँगे ??

गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध सुत्रपात

धर्मप्राण भारत के हरदे सम्राट ब्रह्रालीन अन्न्त श्री स्वामी श्री करपात्री जी महाराज द्वारा संवंत २00१ में संस्थापित अक्षिल भारतवासीय धर्मसंघ ने अपने जन्मकाल से ही मॉ भारतीय के प्रतीक गो रक्षा पालन पूजा एंव संर्वधन को अपने प्रमुखा उद्देश्यो में स्थान दिया था। सन २१४६ में देश में कांग्रेस की अंतरिम सरकार बनी । भारतीय जनता ने अपनी सरकार से गोहत्या के कलंक को देश के मस्तक से मिटाने की मांग की। किंतु सत्ताधारी नेताओं ने पूर्व घोषणाओ की उपेक्षा कर धर्मप्राण भारत की इस मांग को ठुकरा दिया। सरकार की इस उपेक्षावर्ती से देश के गोभक्त नेता एवं जागरूक जनता चिन्तित हो उठी। उन्हे इससे गहरा आघात लगा। सन` १

गाय ने बदल दी गांव की जिंदगी

गाय ने बदल दी गांव की जिंदगी

मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के इमलिया गौंडी गांव के लोगों की जिंदगी में गौ-पालन ने बड़ा बदलाव ला दिया है। एक तरफ जहां वह लोगों के रोजगार का जरिया बन गई है, वहीं गाय की सौगंध खाकर लोग नशा न करने का संकल्प भी ले रहे हैं। इमलिया गौंडी गांव में पहुंचते ही 'गौ संवर्धन गांव' की छवि उभरने लगती है, क्योंकि यहां के लगभग हर घर में एक गाय है। इस गाय से जहां वे दूध हासिल करते हैं, वहीं गौमूत्र से औषधियों और कंडे (उपला) का निर्माण कर धन अर्जन कर रहे हैं। इस तरह गांव वालों को रोजगार भी मिला है। भोपाल स्थित गायत्री शक्तिपीठ द्वारा इस गांव के जंगल में गौशाला स्थापित की गई है। इस गौशाला के जरिए उन परिवारों को

Pages