गोवंशरक्षा - कल आज और कल

गोवंशरक्षा - कल आज और कल

गोवंशरक्षा - कल आज और कल गोवंश का इतिहास मनुष्य और सृष्टि के प्रारम्भ से शुरु होता है. पृथु मनु ने गोदोहन किया और पुथ्वी पर कृषि का प्रारंभ किया और यह धरा पृथ्वी कहलाई. मानव संरक्षण, कृषि और अन्न उत्पादन में गोवंश का अटूट सहयोग और साथ रहा है. इसही कारण ह्मर्रे शास्त्र वेद पुराण गोमहिमा से भरे है. रघुवंश के रजा दिलीप गोसेवा के पर्याय और राम जन्म सुरभि के दुग्ध द्वारा तैआर खीर से माना गया है यहां तक कि गाय (गोबर) का मलमूत्र एक पर्यावरण रक्षक के रूप में माना जाता था और फर्श और घरों की दीवारों रसोई में इस्तेमाल किया गया था. गोमूत्र शुद्ध करने के लिए हर घर,मानव शरीर में छिड़काव एक आम बात थी.

गोमाता को वचन दे के प्लास्टिक का उपयोग बंद करेगे

गोमाता को वचन दे के प्लास्टिक का उपयोग बंद करेगे

आईये हम सब गोमाता को वचन दे के प्लास्टिक का उपयोग बंद करेगे ।
कोई भी वयक्ति जो प्लास्टिक का उपयोग करता है,गोमाता के लिये किसी हत्यारे से कम नही है।
क्यिोंकी प्लास्टिक खाने के बाद गोमाता के बचने कि संभावना ना के बराबर रहती है।
इसलिये यदि पुण्य नही कमा सकते, कम से कम पाप तो ना कमाये।

गोवर्धनधारी की दुलारी गौ माँ

गोवर्धनधारी की दुलारी गौ माँ

गोवर्धनधारी की दुलारी गौ माँ
साधु संतोँ मुनियोँ की प्यारी गौ माँ
ममता की मृदु फुलवारी गौ माँ
पर्यावरण की रखवाली गौ माँ
मानव पे सदा उपकारी गौ माँ
कदम कदम सुखकारी गौ माँ
हाय फिर भी है दुखियारी गौ माँ
संकट मेँ आज है हमारी गौ माँ
.
गौमाता का दूध अमृत समान है
गोबर और मूत्र भी गुणोँ की खान हैँ
रक्तचाप मधुमेह ज्वर अस्थमा
कैँसर जैसे रोगोँ का ये करे खात्मा
गौमूत्र के जैसे एंटीबॉयटिक नहीँ है
घी से ज्यादा कुछ स्वास्थ्यदायक नहीँ है
हृदय रोग मेँ भी गुणकारी गौ माँ
संकट मेँ आज है हमारी गौ माँ
.

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अबला गैया हाय तुम्हारी है यह दुखद कहानी,

अबला गैया हाय तुम्हारी है यह दुखद कहानी,

अबला गैया हाय
तुम्हारी है यह दुखद कहानी,
माँ कह कर भी कुछ लोगों, ने कदर न
तेरी जानी..
कोई तुझको डंडा मारे,कोई बस दुत्कारे,
भूखी-प्यासी भटक रही है, तू तो द्वारे-द्वारे.
देख दुर्दशा तेरी मैया, बहे नैन से पानी.
अबला गैया हाय
तुम्हारी है यह दुखद कहानी.
पीकर तेरा दूध यहाँ पर, जिसने ताकत पाई,
वही एक दिन पैसे खातिर, निकला निपट
कसाई.
स्वारथ में अंधी दुनिया ने, बात कहाँ-कब
मानी.
अबला गैया हाय
तुम्हारी, है यह दुखद कहानी.
गो-सेवा का अर्थ यहाँ अब, केवल रूपया-पैसा,

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