गौपूजन से हो जाता है 33 करोड़ देवी-देवता का पूजन

गौपूजन से हो जाता है 33 करोड़ देवी-देवता का पूजन

सृष्टि में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास है। यदि एक दिन में एक देवता की पूजा भी करें, तो एक जीवनकाल में सभी देवी-देवताओं की पूजा करना असंभव है। धरा पर गौमाता ऐसा जीव है, जिसमें शास्त्रों के अनुसार 33 करोड़ देवी-देवता वास करते हैं। गौमाता के पूजन से सभी देवी-देवताओं का पूजन हो जाता है।

ये विचार आरएसएस के कुक्षी जिला संघचालक दत्तेश शर्मा ने गौकुल धाम गौशाला में रविवार रात आयोजित गौरक्षा संगोष्ठी में व्यक्त किए। 

भारतीय नस्ल के गाय की 15 खूबियां, जो उन्हें माता का दर्जा प्रदान करती है

भारतीय नस्ल के गाय की 15 खूबियां, जो उन्हें माता का दर्जा प्रदान करती है

1.  भविष्य पुराण में लिखा गया है कि गोमाता कि पृष्ठदेश में ब्रह्म का गले में विष्णु का, मुख में रुद्र का, मध्य में समस्त देवताओं का और रोमकूपों में महर्षिगण, पूँछ में अन्नत नाग, खूरों में समस्त पर्वत, गौमूत्र में गंगा, गौमय में लक्ष्मी और नेत्रों में सूर्य-चन्द्र का वास  हैं।

अत्यंत गुणकारी सिद्ध होती है।

अत्यंत गुणकारी सिद्ध होती है।

गाय ही एकमात्र ऐसा प्राणी है, जिसका मल-मूत्र न केवल गुणकारी, बल्कि पवित्र भी माना गया हैं।

गोबर में लक्ष्मी का वास होने से इसे 'गोवर' अर्थात गौ का वरदान कहा जाना ज़्यादा उचित होगा।

गोबर से लीपे जाने पर ही भूमि यज्ञ के लिए उपयुक्त होती है।

गोबर से बने उपलों का यज्ञशाला और रसोई घर, दोनों जगह प्रयोग होता है।

गोबर के उपलों से बनी राख खेती के लिए अत्यंत गुणकारी सिद्ध होती है।

गोबर की खाद से फ़सल अच्छी होती है और सब्जी, फल, अनाज के प्राकृतिक तत्वों का संरक्षण भी होता है।

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अनमोल उपहार है मनुष्य जीवन

अनमोल उपहार

जीवन परमात्मा का अनमोल उपहार है। यह स्वयं ही इतना दिव्य, पवित्र और परिपूर्ण है कि संसार का कोई भी अभाव इसकी पूर्णता को खंडित करने में असमर्थ है। आवश्यकता यह है कि हम अपने मन की गहराई से अध्ययन कर उसे उत्कृष्टता की दिशा में उन्मुख करें।

ईर्ष्या, द्वेष, लोभ एवं अहम के दोषों से मन को विकृत करने के बजाए अपनी जीवनशैली को बदल कर सेवा, सहकार, सौहार्द जैसे गुणों के सहारे मानसिक रोगों से बचा जा सकता है और मानसिक क्षमताओं को विकसित किया जा सकता है।

इसीलिए कहा जाता है कि मनुष्य जीवन चार तरह की विशेषताएं लिए रहता है।

इस संबंध में एक श्लोक प्रस्तुत है -

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