सामुहिक गौशाला

सामुहिक गौशाला

यदि आप कालोनी में या शहर में रहते हैं... आपका दो कमरे का मकान है... या आप कहीं चौथी मंजिल पर रहते हैं, तो भी आप गौपालन कर सकते हैं ।। भारतीय गौवंश के संरक्षण में आप भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं... यह काम आर्थिक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से तो महत्वपूर्ण हैही... स्वास्थ्य रक्षण का बेहतरीन काम भी सामुहिक रूप से गौशाला खोलकर किया जा सकता है... 

एक बात.. सौ टके की... 

गावो भगो गावः इन्द्रो म इच्छाद्रावः सोमस्य प्रथमस्य भक्षः

गावो भगो गावः इन्द्रो म इच्छाद्रावः सोमस्य प्रथमस्य भक्षः

वेदों में गाय का महत्व अतुलनीय व श्रेष्ठतम है। गाय रुद्रों की माता, वसओं की पुत्री, अदिति पुत्रों की बहन तथा अमृत का खजाना है। अथर्ववेद के 21वें सूक्त को गौ सूक्त कहा जाता है। इस सूक्त के ऋषि ब्रह्मा तथा देवता गऊ है। गायें हमारी भौतिक व आध्यात्मिक उन्नति के प्रधान साधन है। मनुष्य को धन–बल–अन्न व यश पाने के लिए गऊ सूक्त का रोज़ पाठ करना चाहिए। आरोग्य व पराक्रम पाने के लिए गाय के दूध, मक्खन व घी का सेवन करने से पूर्व इस सूक्त का पाठ मात्र करने से सर्वारिष्ट शांत होते है।

माता रुद्राणां दुहिता वसूनां स्वसादित्यनाममृत्सय नाभिः।

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मैनेजर की नौकरी छोड़ खोली गोशाला

मैनेजर की नौकरी छोड़ खोली गोशाला

सरकारी अफसरों से भरे परिवार में उसने बहुत पहले तय कर लिया था कि वह अपने मन का काम करेगी. इसीलिए 2010 में उसने एसबीआइ लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के दिल्ली में कनॉट प्लेस वाले दफ्तर की मैनेजरी को तौबा किया और मुंबई चली गई. यहां एक सहेली के साथ मिलकर लोखंडवाला में ‘बॉटलग्रीन’ नाम से स्टाइलिश कपड़ों का शोरूम शुरू कर दिया. काम चल निकला.

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