गाय ने बदल दी गांव की जिंदगी

गाय ने बदल दी गांव की जिंदगी

मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के इमलिया गौंडी गांव के लोगों की जिंदगी में गौ-पालन ने बड़ा बदलाव ला दिया है। एक तरफ जहां वह लोगों के रोजगार का जरिया बन गई है, वहीं गाय की सौगंध खाकर लोग नशा न करने का संकल्प भी ले रहे हैं। इमलिया गौंडी गांव में पहुंचते ही 'गौ संवर्धन गांव' की छवि उभरने लगती है, क्योंकि यहां के लगभग हर घर में एक गाय है। इस गाय से जहां वे दूध हासिल करते हैं, वहीं गौमूत्र से औषधियों और कंडे (उपला) का निर्माण कर धन अर्जन कर रहे हैं। इस तरह गांव वालों को रोजगार भी मिला है। भोपाल स्थित गायत्री शक्तिपीठ द्वारा इस गांव के जंगल में गौशाला स्थापित की गई है। इस गौशाला के जरिए उन परिवारों को

वेद सार्वभौमिक मानव धर्म के अधिकारिक प्रतिनिधि व आदिस्रोत’

वेद सार्वभौमिक मानव धर्म के अधिकारिक प्रतिनिधि व आदिस्रोत’

संसार के सभी मनुष्यों वा स्त्री-पुरुषों पर ध्यान केन्द्रित करें तो यह सभी एक बहुत ही बुद्धिमान व सर्वव्यापी कलाकार की रचनायें अनुभव होती हैं। संसार भर में सभी मनुष्य की दो आंखे, दो कान, नाक, मुंह, गला, शिर, वक्ष, उदर, कटि व पैर प्रायः एक समान ही हैं। सभी मनुष्यों का कर्तव्य है कि वह अपने बनाने वाले को जाने, उसका धन्यवाद करें, उससे कृतज्ञ एवं अनुग्रहीत हों। यही मनुष्यता वा मानवधर्म का आधार व मुख्य सिद्धान्त है। आज का मनुष्य अनेक प्रकार के ज्ञान से सम्पन्न है। विज्ञान तो अपनी चरम अवस्था पर आ पहुंच है परन्तु यदि धार्मिक व सामाजिक ज्ञान की बात करें तो आज भी संसार में इस क्षेत्र में अधिकांशतः कृ

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वेद आर्यसमाज और गणतन्त्र प्रणाली

वेद आर्यसमाज और गणतन्त्र प्रणाली

भारत का इतिहास उतना ही पुराना है जितना की इस सृष्टि के बनने के बाद प्राणी जगत व मानव उत्पत्ति के बाद का सृष्टि का इतिहास। सभी मनुष्यों को नियम में रखने व सभी श्रेष्ठ आचरण करने वाले मनुष्यों को अच्छा भयमुक्त व सद्ज्ञानपूर्ण वैदिक परम्पराओं के अनुरुप वातावरण देने के लिए एक आदर्श राजव्यवव्स्था की आवश्यकता एवं उपयोगिता स्वयंसिद्ध है। वैदिक मान्यताओं के अनुसार इस सृष्टि में मानव उत्पत्ति का इतिहास 1 अरब 96 करोड़ 8 लाख 53 हजार 115 वर्ष पूर्व आरम्भ होकर वर्तमान समय तक चला आया है। 15 अगस्त, 1947 को अंग्रेजों की दासता से स्वतन्त्र होने से पूर्व भी इस देश में अगणित राजा हुए जिन्होंने देश पर राज किया

गौ हत्या से प्राक्रतिक आपदाये..

प्राणियों पर हिंसा से प्राकृतिक आपदाएं … कतलखानों में जब जानवरों को कतल किया जाता है तोह बहुत बेरहमी के साथ क्या जाता है बहुत हिंसा होती है बहुत अत्याचार होता है | जानवरों का कतल होते समय उनकी जो चीत्कार निकलती है, उनके शरीर से जो स्ट्रेस होरमोन निकलते है और उनसे शोक वेबस (तरंगें ) निकलती है वो बहुत ज्यादा पावर फुल होती हैं .ये तरंगें पूरी दुनिया को तरंगित कर देती है, कम्पायमान कर देती है | जानवरों को जब काटा जाता है तो बहुत दिनों तक उनको भूखा रखा जाता है और कमजोर किया जाता है फिर इनके ऊपर ७० डिग्री सेंटीग्रेड ताप के गरम पानी की बौछार डाली जाती है उससे उनका शरीर फूलना शुरू हो जाता है तब गाय

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