गौभक्त विचार

गंगाजल ख़राब क्यों नहीं होता?

हिमालय की कोख गंगोत्री से निकली गंगा (भागीरथी), हरिद्वार (देवप्रयाग) में अलकनंदा से मिलती है। यहाँ तक आते-आते इसमें कुछ चट्टानें घुलती जाती हैं जिससे इसके जल में ऐसी क्षमता पैदा हो जाती है जो पानी को सड़ने नहीं देती। हर नदी के जल की अपनी जैविक संरचना होती है, जिसमें वह ख़ास तरह के घुले हुए पदार्थ रहते हैं जो कुछ क़िस्म के जीवाणु को पनपने देते हैं और कुछ को नहीं। वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि गंगा के पानी में ऐसे जीवाणु हैं जो सड़ाने वाले कीटाणुओं को पनपने नहीं देते, इसलिए पानी लंबे समय तक ख़राब नहीं होता।

मैनेजर की नौकरी छोड़ खोली गोशाला

मैनेजर की नौकरी छोड़ खोली गोशाला

सरकारी अफसरों से भरे परिवार में उसने बहुत पहले तय कर लिया था कि वह अपने मन का काम करेगी. इसीलिए 2010 में उसने एसबीआइ लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के दिल्ली में कनॉट प्लेस वाले दफ्तर की मैनेजरी को तौबा किया और मुंबई चली गई. यहां एक सहेली के साथ मिलकर लोखंडवाला में ‘बॉटलग्रीन’ नाम से स्टाइलिश कपड़ों का शोरूम शुरू कर दिया. काम चल निकला.

गाय के सिंग भी होते हैं चमत्कारी

गाय के सिंग भी होते हैं चमत्कारी

गाय को शास्त्रों में माता का स्थान दिया गया है। गाय की सेवा करने के कारण भगवान श्री कृष्ण गोपाल कहे जाते हैं। शास्त्रों में तो यह भी कहा गया है कि शिवलोक, बैकुण्ठ लोक, ब्रह्मलोक, देवलोक, पितृलोक की भांति गोलोक भी है। गोलोक के स्वामी भगवान श्री कृष्ण हैं।

गाय का इतना महत्व यूं ही नहीं है। गाय का दूध माता के दूध के समान फायदेमंद माना जाता है इसलिए बच्चों को गाय का दूध पिलाया जाता है। गाय के गोबर से घर आंगन और पूजा स्थान की शुद्घि होती है। आपने देखा होगा कि गोपूजा के दिन लोग गाय के सिंग में तेल और सिंदूर लगाते हैं। कल्याण पत्रिका में इसका वैज्ञानिक कारण बतया गया है है।

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