गौभक्त विचार

इस्लाम धर्म में गाय का महत्व——-

देश में विद्वेषपूर्ण और भ्रमक प्रचार किया जाता हैं कि इस्लाम गौवध कि इजाजत देता हैं | किन्तु ऐसा नहीं हैं निम्नलिखित उदाहरणों व तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट होता हैं कि इस्लाम व पैगम्बर साहब सदा गाय को आदर की नजर से देखते थे |
——( बेगम हजरत आयशा में ) हजरत मों. साहब लिखते हैं कि गाय का दूध बदन की ख़ूबसूरती और तंदुरुस्ती बढाने का बड़ा जरिया हैं |
—–(नासिहते हाद्रो) हजरत मों. साहब लिखते हैं कि गाय का दूध और घी तंदुरुस्ती के लिए बहुत जरूरी हैं | और उसका मांस बीमारी पैदा करता हैं | जबकि उसका दूध भी दवा हैं |

घर घर में गोपालन हो

घर घर में गोपालन हो । अपने हाथ से गोसेवा करने का सौभाग्य हर परिवार को प्राप्त हो । प्रत्यक्ष जिनके भाग्य में यह गोसेवा नहीं वे रोज गोमाता का दर्शन तो करें । मन ही मन पूजन, प्रार्थना करें व प्रतिदिन अपनी आय का कुछ भाग इस हेतु दान करें । किसी ना किसी रूप में गाय हमारे प्रतिदिन के चिंतन, मनन व कार्य का हिस्सा बनें । यही मानवता की रक्षा का एकमात्र उपाय है ।

गौमाता के दर्शन मात्र से ऐसा पुण्य प्राप्त होता है

गौमाता के दर्शन मात्र से ऐसा पुण्य प्राप्त होता है

भारत में वैदिक काल से ही गाय का महत्व माना जाता है। आरम्भ में आदान-प्रदान एवं विनिमय आदि के माध्यम के रूप में गाय का उपयोग होता था और मनुष्य की समृद्धि की गणना उसकी गौसंख्या से की जाती थी।

हिन्दू धार्मिक दृष्टि से भी गाय पवित्र मानी जाती है तथा उसकी हत्या महापातक पापों में मानी जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जो चौदह रत्न प्रकट हुए थे उनमे से गौ “कामधेनु”भी एक रत्न है। पूज्य गौमाता अहिंसा, करुणा, ममत्व वात्सल्यादि दिव्य गुणों को पुष्ट करती है।

गोवर्धन पूजा का महत्व और विधि

गोवर्धन पूजा का महत्व और विधि

कार्तिक मास की शुक्लपक्ष की प्रतिपदा को ही गोवर्धन पूजा की जाती है। इसे अन्नकूटए बलि पूजा और मार्गपाली जैसे नामों से भी जाना जाता है। गोवर्धन की पूजा भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से शुरू हुई। वैदिक वाटिका आपको बता रही है कैसे की जाती है गोवर्धन पूजा और इस पूजा से कौन कौन सी समस्याएं दूर होती हैं आपकी।
गोवर्धन पूजा का महत्व और  विधि

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