गाय और आस्था

दूध से करें ये छोटे से उपाय, घर में होगा लक्ष्मी का स्थाई वास

हिंदू धर्म में चंद्रमा को भगवान के रुप में माना जाता है। माना जाता है कि अगर आपको चंद्रमा खराब है, तो उपाय करने से आपके ऊपर उनकी दया जरुर बनती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार माना जाता है कि दूध चंद्रमा का कारक है। जिस तरह शिवलिंग में दूध अर्पित करने से सभी ग्रहों का अशुभ फल खत्म हो जाता है। वहीं राहु के बुरे प्रभाव को खत्म करने के लिए सांप को दूध पिलाना अच्छा माना जाता है। इसी तरह कई उपाय है। जिन्हें थोड़े से दूध के द्वारा करने पर आपको धन-धान्य, बल-बुद्धि की प्राप्ति होगी। हर काम में सफलता भी प्राप्त होगी। इतना ही नहीं दूध का कई उपाय करने से आपके घर लक्ष्मी का वास भी हो जाता है। ये भी पढ़े-

सात्विक जीवन

सात्विक जीव

किसी व्यक्ति या प्राणी को तभी सात्विक कहा जा सकता है जब उस प्राणी की प्रवृत्ति मुख्यतः सात्विक हो. "सात्विक" नाम का अर्थ दैवीय, शुद्ध और आध्यात्मिक लोगों से है।

सत्त्व मन की एक अवस्था है जिसमें मन स्थिर, शांत और शांतिपूर्ण होता है।

हिन्दू दर्शन में, सत्त्व ,सांख्य दर्शन में वर्णित तीन गुणों में से एक है। अन्य दो गुण हैं - रजस् और तमस् । सत्वगुण का अर्थ 'पवित्रता' है।

शाब्दिक अर्थ : "अस्तित्व, वास्तविकता"

विशेषण : सात्विक

सात्त्विक वस्तुएं

दिव्य गुणों की स्वामिनी गौ माता 

दिव्य गुणों की स्वामिनी गौ माता 

दिव्य गुणों की स्वामिनी गौ माता | गौ या गाय हमारी संस्कृति की प्राण है। यह गंगा, गायत्री, गीता, गोव‌र्द्धन और गोविंद की तरह पूज्य है। शास्त्रों में कहा गया है-मातर: सर्वभूतानांगाव:, यानी गाय समस्त प्राणियों की माता है। इसी कारण आर्य-संस्कृति में पनपे शैव, शाक्त, वैष्णव, गाणपत्य, जैन, बौद्ध, सिख आदि सभी धर्म-संप्रदायों में उपासना एवं कर्मकांड की पद्धतियों में भिन्नता होने पर भी वे सब गौ के प्रति आदर भाव रखते हैं। हम गाय को गोमाता कहकर संबोधित करते हैं।

गौ संवर्धन दीपयज्ञ

गौ संवर्धन दीपयज्ञ

गौ संवर्धन दीपयज्ञ करने के पूर्व, गौ की उपयोगिता एवं उसके महत्त्व को प्रदर्शित करने के लिए पर्चे बांट कर, चित्र प्रदर्शनियां लगाकर, वीडियो फिल्में आदि दिखाकर तथा परिजनों की गोष्ठियां लेकर उपयुक्त माहौल बना लेना चाहिए। चित्र प्रदर्शनी एवं वीडियो फिल्में प्राप्त करने के लिए, रचनात्मक प्रकोष्ठशांतिकुञ्ज हरिद्वार से संपर्क किया जा सकता है। इस प्रदर्शनी के साथ पंचगव्य निर्मित औषधियों, उपयोगी वस्तुओं एवं कीट नियंत्रकों आदि के प्रदर्शन एवं बिक्री की व्यवस्था भी की जा सकती है। 

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