गाय और आस्था

अहिंसा परमों धर्म:

अहिंसा परमों धर्म:

अहिंसा परमों धर्म:
हर घर में हो एक गाय और गाँव-गाँव गौशाला,
ऐसा गर हो जाये तो फिर भारत किस्मतवाला.
गाय हमारी माता है यह, नहीं भोग का साधन.
इसकी सेवा कर लें समझो, हुआ प्रभु-आराधन.
दूध पियें हम इसका अमृत, गाय ने हमको पाला.
हर घर में हो एक गाय और गाँव-गाँव गौशाला...
गाय दूर करती निर्धनता, उन्नत हमें बनाए,
जो गायों के साथ रहे वो, भवसागर तर जाए.
गाय खोल सकती है सबके, बंद भाग्य का ताला.
हर घर में हो एक गाय और गाँव-गाँव गौशाला...
'पंचगव्य' है अमृत यह तो, सचमुच जीवन-दाता.
स्वस्थ रहे मानव इस हेतु, आई है गऊ माता.

अबला गैया हाय तुम्हारी है यह दुखद कहानी,

अबला गैया हाय तुम्हारी है यह दुखद कहानी,

अबला गैया हाय
तुम्हारी है यह दुखद कहानी,
माँ कह कर भी कुछ लोगों, ने कदर न
तेरी जानी..
कोई तुझको डंडा मारे,कोई बस दुत्कारे,
भूखी-प्यासी भटक रही है, तू तो द्वारे-द्वारे.
देख दुर्दशा तेरी मैया, बहे नैन से पानी.
अबला गैया हाय
तुम्हारी है यह दुखद कहानी.
पीकर तेरा दूध यहाँ पर, जिसने ताकत पाई,
वही एक दिन पैसे खातिर, निकला निपट
कसाई.
स्वारथ में अंधी दुनिया ने, बात कहाँ-कब
मानी.
अबला गैया हाय
तुम्हारी, है यह दुखद कहानी.
गो-सेवा का अर्थ यहाँ अब, केवल रूपया-पैसा,

लोगों में गो रक्षा की भावना कम क्यों हो रही है ?

प्रश्न— लोगों में गो रक्षा की भावना कम
क्यों हो रही है ?
उत्तर— गाय के कलेजे, मांस, खून आदि से बहुत-
सी अंग्रेजी दवाइयाँ बनती हैं | उन दवाइयों का सेवन
करनेसे गाय के मांस, खून आदि का अंश लोगों के पेट में
चला गया है और उनकी बुद्धि मलिन हो गयी है और
उनकी गाय के प्रति श्रद्धा, भावना नहीं रही है |
लोग पापसे पैसा कमाते है और उन्हीं पैसों का अन्न
खाते हैं, फिर उनकी बुद्धि शुद्ध कैसे होगी और
बुद्धि शुद्ध हुए बिना सच्ची, हितकर बात अच्छी कैसे
लगेगी ?
स्वार्थबुद्धि अधिक होने से मनुष्य की बुद्धि भ्रष्ट

गाय मईया की महिमा तो अपार है

गाय मईया की महिमा तो अपार है जिसका उलेख शास्त्रों और पुराणों में वर्णित है संत महात्माओ ने गो माता की महिमा के सम्बन्ध में अनेको व्याख्यान दिए है !
मातर: सर्वभूतानां गाव:
गाय सनातन संस्कृति की रीढ़ है !वेद शास्त्रों के अनुसार गाय माता पृथ्वी के समस्त प्राणियो की जननी है !
गाय के सींगो में ब्रह्मा,ललाट में शंकर,कानो में अश्वनी कुमार,नेत्रों में सूर्य चन्द्र,जीवा में पृथ्वी, पीठ पर नक्षत्रगण,गोबर में महालक्ष्मी,और थनों में चारो समुद्र निवास करते है !

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