गाय और आस्था

सारी सृष्टि में केवल दो ही प्राणियों के देह ऐसे हैं जिनमे पूरे तैंतीस कोटी प्राण निवास करते हैं- गाय और मानव ।

सारी सृष्टि में केवल दो ही प्राणियों के देह ऐसे हैं जिनमे पूरे तैंतीस कोटी प्राण निवास करते हैं- गाय और मानव ।

सारी सृष्टि में केवल दो ही प्राणियों के देह ऐसे हैं जिनमे पूरे तैंतीस कोटी प्राण निवास करते हैं- गाय और मानव । मानव को कर्म स्वातंत्र्य होने के कारण वह उन प्राणों का साक्षात्कार कर अपनी आध्यात्मिक उन्नति के लिये उनका प्रयोग कर सकता है । इसी के लिये गोमाता का पूजन व सान्निध्य अत्यन्त उपयोगी है । इस विज्ञान के कारण ही गाय को समस्त देवताओं के निवास के रूप में पूजा जाता है । सभी धार्मिक अनुष्ठानों में गाय के पंचगव्यों का महत्व होता है । गोबर से लिपी भूमि, दूध, दही, घी से बना प्रसाद, गोमूत्र का सिंचन तथा गोमाता का पूजन पूरे तैंतीस करोड प्राणों को जागृत कर पूजास्थल को मानव के सर्वोच्च आध्यात्मिक

मां के दूध के बाद सबसे पौष्टिक आहार देसी गाय का दूध ही है ।

मां के दूध के बाद सबसे पौष्टिक आहार देसी गाय का दूध ही है ।

गाय का यूं तो पूरी दुनिया में ही काफी महत्व है, लेकिन भारत के संदर्भ में बात की जाए तो प्राचीन काल से यह भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। चाहे वह दूध का मामला हो या फिर खेती के काम में आने वाले बैलों का। वैदिक काल में गायों की संख्‍या व्यक्ति की समृद्धि का मानक हुआ करती थी। दुधारू पशु होने के कारण यह बहुत उपयोगी घरेलू पशु है।

गोरक्षा - आन्दोलन का संक्षिप्त इतिहास

गोरक्षा - आन्दोलन का संक्षिप्त इतिहास

गोवंश सदैव से भारतीय धर्म कर्म एंव संस्कृति का मूलाधार रहा है। कृषि प्रधान देश होने से भारतीय अर्थव्यवस्था    का स्त्रोत  रहा है। भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अमर सैनानियो-लोकमान्य तिलक महामना मालवीय गोखले  आदि ने  यह घोषणा की थी स्वराज्य मिलते ही गोवध तुरना बंन्द कराया जायगा। उपयुर्क्त नेताओं की घोषणाओ को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता को आशा थी कि अंग्रजी शासन चले जाने के साथ ही साथ गोहत्या का कलंक  भी इस देश से मिट जायगा। किन्तु वह आशा फलीभूत नहीं हुई। इसे देश का दुभार्ग्य ही कहा जायगा

गाय को “गोधन” कहा जाता रहा है

गाय को “गोधन” कहा जाता रहा है

भारतीय विज्ञान की दिशा अंदर से बाहर की ओर है । आधुनिक विज्ञान बाह्य घटनाओं के निरीक्षण व प्रयोग के द्वारा उसमें छिपे सत्य को पहचानने का प्रयत्न करता है । हिन्दू विज्ञान सूक्ष्म से स्थूल की ओर ले जाता है तो आधुनिक विज्ञान ठोस स्थूल के माध्यम से विश्लेषण व निष्कर्ष की विधि द्वारा सूक्ष्म को पकडने का प्रयास कर रहा है । इस मूलभूत भेद को समझने से हम भारतीय वैज्ञानिक दृष्टि का सही विकास कर सकते हैं । फिर हम अपने अज्ञान के कारण ॠषियों द्वारा स्थापित परम्पराओं को अन्धविश्वास के रूप में नकारने के स्थान पर उनमें छिपे गूढ तत्व को समझने का प्रयत्न करेंगे । गाय को भारतीय जीवन में दिये जाने वाले महत्व को

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