गौ महिमा

गो गव्य ही सर्वोत्तम आहार हैं।

यज्ञ में काम लिया जाने वाला घृत केवल और केवल गो-घृत ही होना चाहिये, तभी देवता उसको ग्रहण करेंगे। बाजारू घृत जो कि चर्बीयुक्त हो सकता है या फिर अन्य पशुओं का घृत जो कि अशुद्ध माना जाता है, देवता नहीं दानव ग्रहण करेंगे। उससे देव शक्ति की बजाय दानवी शक्ति का पोषण होगा। परिणाम हमारे लिये निश्चित उल्टा ही होगा। अतः यज्ञ में केवल गो-गव्यों का ही प्रयोग करना चाहिये। शास्त्र विरुद्ध किया गया कार्य पूरी सृष्टि के लिये हानिकारक होता है। शास्त्र में जहाँ भी दूध, दही, छाछ, मक्खन, घृत आदि उल्लेख किया गया है वो केवल गाय के गव्य ही हैं, क्योंकि उस समय भैंस, जर्सी, हॉलिस्टीयन जैसे पशुओं का व्यवहार कहीं भी

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गौशाला में जाकर दूर कर सकते हैं अपनी कुंडली के दोष

गौशाला में जाकर दूर कर सकते हैं अपनी कुंडली के दोष

यदि अपने दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलना हो तो करें यह अचूक
उपाय---गौशाला में जाकर दूर कर सकते हैं
अपनी कुंडली के दोष
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कभी-कभी न चाहते हुए
भी जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ता है।
भाग्य बिल्कुल भी साथ नहीं देता साथ
ही दुर्भाग्य निरन्तर पीछा करता रहता है।
दुर्भाग्य से बचने के लिए या दुर्भाग्य नाश के लिए करें यहाँ बताए गये
उपाय करें। इन्हें पूर्ण आस्था के साथ करने से दुर्भाग्य का नाश
होकर सौभाग्य में वृद्धि होती है। बस आप इन
उपायों को करते रहें

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भारतीय नस्ल के 20 सर्वाधिक लोकप्रिय गोवंश

भारतीय नस्ल के 20 सर्वाधिक लोकप्रिय गोवंश

भारतीय नस्ल के 20 सर्वाधिक लोकप्रिय गोवंशभारत में गाय को देवी का दर्जा प्राप्त है। ऐसी मान्यता है कि गाय के शरीर में 33 करोड़ देवताओं का निवास है। गोवंश का यूं तो पूरी दुनिया में ही काफी महत्व

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