गौ महिमा

भारत वर्ष में गाय को माता के समान माना जाता है।

आदि काल से भारत वर्ष में गाय को माता के समान माना जाता है। गाय को मां समझ कर उसकी सेवा की जाती है। गाय वास्तव में सारे जगत की माता है। ‘मातरः सर्व भूतानाम गावः सर्व फल प्रदाम’ वह धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के साथ-साथ और भी कोई फल है तो भी प्रदान करती है।

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गाय का आध्यात्मिक महत्वः

गाय का आध्यात्मिक महत्वः

गाय का विश्व स्तर पर आध्यात्मिक महत्व है, ''गावो विश्वस्य मातरः''। नवग्रहों सूर्य, चंद्रमा, मंगल, राहु, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, केतु के साथ साथ वरूण, वायु आदि देवताओं को यज्ञ में दी हुई प्रत्येक आहुति गाय के घी से देने की परंपरा है, जिससे सूर्य की किरणों को विशेष ऊर्जा मिलती है। यही विशेष ऊर्जा वर्षा का कारण बनती है, और वर्षा से ही अन्न, पेड़-पौधों आदि को जीवन प्राप्त होता है। हिंदू धर्म में जितने धार्मिक कार्य, धार्मिक संस्कार होते हैं जैसे नामकरण, गर्भाधान, जन्म आदि सभी में गाय का दूध, गोबर, घी, आदि का ही प्रयोग किया जाता है जहां विवाह संस्कार आदि होते हैं वहां भी गोबर के लेप से शुद्धि

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गौ माता की अद्भुत महिमा

महामहिमामयी गौ हमारी माता है उनकी बड़ी ही महिमा है वह सभी प्रकार से पूज्य है गौमाता की रक्षा और सेवा से बढकर कोई दूसरा महान पुण्य नहीं है |

१. गौमाता को कभी भूलकर भी भैस बकरी आदि पशुओ की भाति साधारण नहीं समझना चाहिये गौ के शरीर में “३३ करोड़ देवी देवताओ” का वास होता है. गौमाता श्री कृष्ण की परमराध्या है, वे भाव सागर से पार लगाने वाली है |

२. गौ को अपने घर में रखकर तन-मन-धन से सेवा करनी चाहिये, ऐसा कहा गया है जो तन-मन-धन से गौ की सेवा करता है. तो गौ उसकी सारी मनोकामनाएँ पूरी करती है. |

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ऐसे करें गौ सेवा ..

घर में गाय के दूध, दही, घृत का उपयोग करें| पंचगव्य निर्मित साबुन, शेम्पू, उबटन तथा ऐसे ही अन्य उत्पादों का अधिकाधिक उपयोग करें| बीमारियों में पंचगव्य औषधियों का उपयोग करें |

भोजन से पहले गो ग्रास देने की आदत सभी परिवारजनों में डालें| परिवार के बच्चों एवं अन्य सदस्यों के साथ गाय के महत्त्व की चर्चा करें |

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