गौ महिमा

पहली रोटी गाय को खिलाएं, क्योंकि........

पहली रोटी गाय को खिलाएं, क्योंकि........

गाय हिंदु धर्म में पवित्र और पूजनीय मानी गई है। शास्त्रों के अनुसार गौसेवा के पुण्य का प्रभाव कई जन्मों तक बना रहता है। इसीलिए गाय की सेवा करने की बात कही जाती है। पुराने समय से ही गौसेवा को धर्म के साथ ...ही जोड़ा गया है। गौसेवा भी धर्म का ही अंग है। गाय को हमारी माता बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि गाय में हमारे सभी देवी-देवता निवास करते हैं। इसी वजह से मात्र गाय की सेवा से ही भगवान प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के साथ ही गौमाता की भी पूजा की जाती है।

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गौ मूत्र पर GST,और कहते है गाय हमारी माता : बाबा रामदेव ने किया GST का विरोध

गौ मूत्र पर GST,और कहते है गाय हमारी माता : बाबा रामदेव ने किया GST का विरोध

जिस प्रकार देश मे कपड़ा और अनाज पर ज्यादा जीएसटी लगाए जाने के खिलाफ देशभर के कपड़ा और अनाज व्यापारी अब सड़कों पर उतर आये थे और देश भर में कपड़ा व्यापारियों ने विरोध के तौर पर एक दिन का बंद कर रखा था। मुंबई और अहमदाबाद के कपड़ा बाजार में दुकानों पर ताले लगे रहे। कई जगहों पर व्यापारियों ने  सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया । इसी को लेकर योग गुरु स्वामी रामदेव भी व्यापारियों के समर्थन में दिखे ,उन्होंने एक निजी चैनल के इंटरव्यू में जीएसटी का विरोध करते हुए मोदी सरकार पर तंज कसे ।

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गौ माता पूजन से पुण्य फल की प्राप्ति

गौ माता पूजन से पुण्य फल की प्राप्ति

लोग पूजा-पाठ करके धन पाने की इच्छा रखते हैं लेकिन भाग्य बदलने वाली तो गौ-माता है। उसके दूध से जीवन मिलता है। रोज पंचगव्य का सेवन करने वाले पर तो जहर का भी असर नहीं होता और वह सभी व्याधियों से मुक्त रहता है। गाय के दूध में वे सारे तत्व मौजूद हैं जो जीवन के लिए जरूरी हैं। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि गाय के दूध में सारे पौष्टिक तत्व मौजूद होते हैं। मीरा जहर पीकर जीवित बच गई क्योंकि वे पंचगव्य का सेवन करती थीं। लेकिन कृष्ण को पाने के लिए आज लोगों में मीरा जैसी भावना नहीं बची।

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गावो भगो गावः इन्द्रो म इच्छाद्रावः सोमस्य प्रथमस्य भक्षः

गावो भगो गावः इन्द्रो म इच्छाद्रावः सोमस्य प्रथमस्य भक्षः

वेदों में गाय का महत्व अतुलनीय व श्रेष्ठतम है। गाय रुद्रों की माता, वसओं की पुत्री, अदिति पुत्रों की बहन तथा अमृत का खजाना है। अथर्ववेद के 21वें सूक्त को गौ सूक्त कहा जाता है। इस सूक्त के ऋषि ब्रह्मा तथा देवता गऊ है। गायें हमारी भौतिक व आध्यात्मिक उन्नति के प्रधान साधन है। मनुष्य को धन–बल–अन्न व यश पाने के लिए गऊ सूक्त का रोज़ पाठ करना चाहिए। आरोग्य व पराक्रम पाने के लिए गाय के दूध, मक्खन व घी का सेवन करने से पूर्व इस सूक्त का पाठ मात्र करने से सर्वारिष्ट शांत होते है।

माता रुद्राणां दुहिता वसूनां स्वसादित्यनाममृत्सय नाभिः।

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