Skahore's blog

गौ हत्या से प्राक्रतिक आपदाये..

प्राणियों पर हिंसा से प्राकृतिक आपदाएं … कतलखानों में जब जानवरों को कतल किया जाता है तोह बहुत बेरहमी के साथ क्या जाता है बहुत हिंसा होती है बहुत अत्याचार होता है | जानवरों का कतल होते समय उनकी जो चीत्कार निकलती है, उनके शरीर से जो स्ट्रेस होरमोन निकलते है और उनसे शोक वेबस (तरंगें ) निकलती है वो बहुत ज्यादा पावर फुल होती हैं .ये तरंगें पूरी दुनिया को तरंगित कर देती है, कम्पायमान कर देती है | जानवरों को जब काटा जाता है तो बहुत दिनों तक उनको भूखा रखा जाता है और कमजोर किया जाता है फिर इनके ऊपर ७० डिग्री सेंटीग्रेड ताप के गरम पानी की बौछार डाली जाती है उससे उनका शरीर फूलना शुरू हो जाता है तब गाय

गो गव्य ही सर्वोत्तम आहार हैं।

यज्ञ में काम लिया जाने वाला घृत केवल और केवल गो-घृत ही होना चाहिये, तभी देवता उसको ग्रहण करेंगे। बाजारू घृत जो कि चर्बीयुक्त हो सकता है या फिर अन्य पशुओं का घृत जो कि अशुद्ध माना जाता है, देवता नहीं दानव ग्रहण करेंगे। उससे देव शक्ति की बजाय दानवी शक्ति का पोषण होगा। परिणाम हमारे लिये निश्चित उल्टा ही होगा। अतः यज्ञ में केवल गो-गव्यों का ही प्रयोग करना चाहिये। शास्त्र विरुद्ध किया गया कार्य पूरी सृष्टि के लिये हानिकारक होता है। शास्त्र में जहाँ भी दूध, दही, छाछ, मक्खन, घृत आदि उल्लेख किया गया है वो केवल गाय के गव्य ही हैं, क्योंकि उस समय भैंस, जर्सी, हॉलिस्टीयन जैसे पशुओं का व्यवहार कहीं भी

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भारतीय गाय का अर्थ शास्त्र……

हर इंसान को ज़ीने के लिए कम से कम 3 चीजों की जरूरत है. हवा, पानी और खाना. स्वच्छ हवा रही नहीं (पेट्रोल, डीज़ल), पीने का पानी मुफ्त मिलता नहीं शुद्धता की बात तो अलग है (रासायनिक खेती, ग्लोबल वार्मिंग, गिरता पानी का स्तर), खाने में भी जहर आ चूका है (रासायनिक खेती से भी और मिलावट करने वाले मुनाफाखोरी से भी). भारत इन तीनों समस्या से जूझ रहा है. भारत की कुछ प्रमुख समस्याएँ :- 1. किसानों की आत्महत्या. (कारण हर चीज बाहर से खरीदना रासायनिक खेती में, जैसे बीज, खाद, कीट नाशक, ट्रैक्टर और उपज के समय मंडी में भाव न मिलना.) 2. बढ़ती महंगाई.

हैरान कर देने वाली बात दूध नहीं देती गाय फिर भी सालाना 3.50 करोड़ का मुनाफा पर कैसे ?

हरियाणा लाडवा : इनके गोशाला में एक भी गाय दूध नहीं देती, फिर भी इनका सालाना मुनाफा करीब 3.50 करोड़ रुपये हैं, है ना चौकाने वाली बात. ऐसा भी नहीं है कि ये किसी अनैतिक व्यापार के जरिये इतना पैसा कमाते हैं. बल्कि इन्होने इस व्यापार के लिए उन गायों को चुना जिन्हें, दूध न दे पाने के कारण लावारिस छोड़ दिया जाता है. कई तरह की बीमारियों के कारण सड़कों पर ये गायें लावारिस पड़ी रहती हैं. ऐसे गायों को एक-एक कर गोशाला में लाकर पहले तो ये सबका इलाज करवाते हैं. फिर इन गायों की सही से देख रेख शुरु होता है, इनका पूरा व्यापार गोबर और गोमूत्र पर चलता है. ये पूरी कहानी है Haryana के लाडवा की.

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