Skahore's blog

गो, गोपाल, गोधरा-पृथ्वी

इस वैज्ञानिक युग में घोर अवैज्ञानिक मतिभ्रम फेेला हुआ है। तभी तो नास्तिकता, हिंसा स्वार्थ लोलुपता आदि अवगुणों को अधिकाधिक प्रश्रय मिल रहा है। मानवता पथभ्रष्ट हो गयी है। मनुष्य का मस्तिष्क और शरीर दोनों विकृत  से प्रतीत हो रहे है। यही कारण है कि विज्ञान के अंधभक्त प्राय: धर्म के नाम से चिढ़ते हैं और विज्ञान का नाम सुनकर धर्म के पैर उखड़ जाते हैं ऐसा कहते हुए भी सुने जाते हैं। यह तो धर्म का उपहास करने वालों का असंगत प्रलाप है। इस धर्मप्राण भारतभूमि में इस प्रकार की उक्ति का उच्चार और व्यवहार दोनों ही अनुचित हैं। इसमें भी संदेह नही किधर्म को प्राण मानने वाली आर्य जाति के कतिपय आचार विचार भी दम

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गोवंश विनाश का एक और आयाम

* वैटनरी वैज्ञानिकों को सिखाया-पढाया गया है कि पोषक आहार की कमी से गऊएं बांझ बन रही हैं। वैग्यानिकों का यह कहना आंशिक रूप से सही हो सकता है पर लगता है कि यह अधूरा सच है। इसे पूरी तरह सही न मानने के अनेक सशक्त कारण हैं।

* बहुत से लोग अब मानने लगे हैं कि शायद करोडों गऊओं के बांझ बनने का प्रमुख  कारण कृत्रिम गर्भाधान है ?

* संन्देह यह भी है कि कहीं न्यूट्रीशन को बांझपन का प्रमुख कारण बताकर बांझपन के वास्तविक कारणों को छुपाया तो नहीं जा रहा ?

सेंधा नमक / काला नमक थायराइड, लकवा, मिर्गी आदि रोगों को रोकता है।

आयोडीन के नाम पर हम जो नमक खाते हैं उसमें कोर्इ तत्व नहीं होता। आयोडीन और फ्रीफ्लो नमक बनाते समय नमक से सारे तत्व निकाल लिए जाते हैं और उनकी बिक्री अलग से करके बाजार में सिर्फ सोडियम वाला नमक ही उपलब्ध होता है जो आयोडीन की कमी के नाम पर पूरे देश में बेचा जाता है, जबकि आयोडीन की कमी सिर्फ पर्वतीय क्षेत्रों में ही पार्इ जाती है इसलिए आयोडीन युक्त नमक केवल उन्ही क्षेत्रों के लिए जरुरी है।

सेन्धा नमक

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गाय भी बन सकती है भैस से बेहतर ..

आज की बछड़ी कल की होने वाली गाय-भैंस है। जन्म से ही उसकी सही देखभाल रखने से भविष्य में वह अच्छी गाय भैंस बन सकती है। स्वस्थ बचपन में अगर बछड़ियों का वजन लगातार तेजी से बढ़ता है तो वे सही समय पर गायश्भैंस बन जाती है। पषु पालक को एक गायश्भैंस से ज्यादा ब्यांतश्ज्याद दूध मिलने से अधिक लाभ होता है। ब्यांहने के पहले, आखिरी के दो महीनों में गर्भ बहुत तेजी से बढ़ता है। इन्ही दो महीनों में गायश्भैंस की पाचन षक्ति कम हो जाती है। ऐसे में संतुलित पशु आहार खिलाना बहुत जरूरी है। बच्चादानी में तेजी से बढ़ रहे बछड़े की सम्पूर्ण बढ़ोत्तरी के लिए गायश्भैंस को आखरी के दो महीने अच्छी गुणवत्ता का संतुलित आहार रोजाना

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