Skahore's blog

गाय भी बन सकती है भैस से बेहतर ..

आज की बछड़ी कल की होने वाली गाय-भैंस है। जन्म से ही उसकी सही देखभाल रखने से भविष्य में वह अच्छी गाय भैंस बन सकती है। स्वस्थ बचपन में अगर बछड़ियों का वजन लगातार तेजी से बढ़ता है तो वे सही समय पर गायश्भैंस बन जाती है। पषु पालक को एक गायश्भैंस से ज्यादा ब्यांतश्ज्याद दूध मिलने से अधिक लाभ होता है। ब्यांहने के पहले, आखिरी के दो महीनों में गर्भ बहुत तेजी से बढ़ता है। इन्ही दो महीनों में गायश्भैंस की पाचन षक्ति कम हो जाती है। ऐसे में संतुलित पशु आहार खिलाना बहुत जरूरी है। बच्चादानी में तेजी से बढ़ रहे बछड़े की सम्पूर्ण बढ़ोत्तरी के लिए गायश्भैंस को आखरी के दो महीने अच्छी गुणवत्ता का संतुलित आहार रोजाना

देशी गाय और गव्यों का महत्व ..

आज हम कितने गर्त में गिर चुके है जो गाय को देशी कहकर संबोधित करना पड़ता है और भगवान कृष्ण के वंशजों को देशी गाय की पहचान बतानी पड़ती है। जिस प्रकार हर पीली वस्तु सोना नहींहोती उसी प्रकार हर चार पैर, चार थन वाला जीव गाय नहीं होता । हम दूध के इतने लालची हो गए है कि विदेशी सूअर (जर्सी ,होल्सटीन,फ्रीजियन ) को भी गाय कहने और मानने लगे है गाय तो देशी ही होती है। गाय की पीठ पर विद्यमान सूर्यके्तु नाडी सौर मंडल की समस्त ऊर्जा को अवशोषित कर अपने गव्यों (दूध ,मूत्र,गौमय) में डालकर समस्त मानव जीवन और प्रकृति को निरोगी एवं सम रखने का कार्य करती हैं। हमारा शरीर पंचमहाभूतों से बना हैं ये प

Blog Category: 

नंदी गोशाला प्रकरण : जिम्मेदारी लेने से ग्रामीण मुकरे, बोले-नहीं संभाल सकते गोशाला

उपखंड क्षेत्र के गोलासन गांव में स्थित देश की सबसे बड़ी नंदीशाला श्री हनुमान महावीर गोशाला के संचालन को लेकर मंगलवार को नया मोड़ आ गया। प्रशासन की ओर से नंदी गोशाला के संचालन के लिए मंगलवार को ग्रामीणों को चाबियां सौंपने का निर्णय हुआ था, लेकिन ऐनवक्त पर ग्रामीणों ने इसके संचालन में असमर्थता जताते हुए इनकार कर दिया। ऐसे में प्रशासन के सामने एक बार फिर से विकट स्थित आ गई है।

गौ के प्रति श्रद्घाभाव रखने से ही बचेगी मानवता : रविकांतसिंह

गौ , श्रद्धाभाव , मानवता

नई दिल्ली। गौमाता इस देश के लिए प्राचीन काल से ही पूजनीया रही है। उसके गुणों से प्रभावित होकर ही हमारे पूर्वजों ने गाय को यह सम्मानित स्थान दिया था। यही कारण है कि आज तक भी इस देश में गौमाता के प्रति सम्मान व्यक्त करने वाले, उसकी रक्षा को अपना जीवनव्रत घोषित करके चलने वालों की देश में कमी नही है। ऐसी ही एक शख्सियत हैं-श्री रविकांतसिंह। जिन्होंने मध्य प्रदेश के जनपद मैहर में गौशाला का निर्माण कराया है।

Pages