गाय और गंगा

गाय और गंगा

गंगा संरक्षण मंत्रालय सम्भालने के कुछ महीने पहले उमा भारती ने कानपुर में गंगा किनारे दिये एक भाषण में टेनरीज पर निशाना साधते हुए कहा था कि गाय को लेकर ऐसा कानून बनाएँगे कि कोई कागज पर बनी गाय को भी काटने की हिम्मत नहीं कर पाएगा। टेनरीज पर रोक लगाना तो दूर उमा भारती उन्हे गंगा में गोवंश का खून बहाने से भी नहीं रोक पा रहीं हैं। कुल मिलाकर गाय और गंगा को लेकर सिर्फ हल्ला मचाया जा रहा है। डेढ़ साल से लोगों को लग रहा है कि बस अब कुछ होने ही वाला है लेकिन यह इन्तजार खत्म ही नहीं हो रहा।

देसी भारतीय गौ वंश है अर्थव्यवस्था का मूल आधार

देसी भारतीय गौ वंश है अर्थव्यवस्था का मूल आधार

गिरती अर्थव्यवस्था. (आयात बिल पेट्रोल डीजल रसोई गैस दवाई उर्वरक सब विदेशो से आता है, घर की जगह विदेशी उत्पादों से मोह किसी भी वजह से)

किसानों की आत्महत्या. (कारण हर चीज बाहर से खरीदना रासायनिक खेती में, जैसे बीज, खाद, कीट नाशक, ट्रैक्टर, डीजल और उपज के समय मंडी में भाव न मिलना.)

बढ़ती महंगाई और बढती गरीबी (मूल कारण अत्यधिक टैक्स, पेट्रोल, डीज़ल की बढ़ती कीमत, रुपये की गिरावट, भ्रस्टाचार और अंग्रेजी व्यवस्था)

बिजली की कमी (प्राकृतिक संसाधन की कमी और उसपर होने वाला खर्च)

पानी की कमी. (ग्लोबल वार्मिंग)

शुद्ध भोजन की कमी (केमिकल FARMING)

बुंदेलखंड में प्यास से मरती गायें, उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को कौन जगाये!

गाय,गौमाता,असुरक्षित , मौत

जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने सर्किट हाउस में की बैठक-

केन्द्रीय जल मंत्री और झाँसी से सांसद उमा भारती ने सर्किट हाउस में बैठक करके बुंदेलखंड पैकेज के अतिरिक्त 400 करोड़ रूपये और देने की घोषणा की है। यह रुपया पूर्व और वर्तमान सांसद की समिति बनाकर उनकी मंशा के अनरूप खर्च किया जायेगा। जो कार्य पहले नही हुए उन्हें प्राथमिकता दी जायेगी,ऐसा जल मंत्री उमा भारती ने कहा है।

मनुष्य तभी जब वह अहिंसा आदि गुणों का पूर्णतया पालन करें’

योगदर्शन महर्षि पतंजलि की मनष्यों को बहुत बड़ी देन है जो मनुष्यों को मनुष्य बनाने का प्रमुख साधन है। योगदर्शन का उद्देश्य मनुष्यों को सुसंस्कारित कर उसे समाधि अवस्था तक पहुंचाना और ईश्वर का साक्षात्कार कराना है। समाधि में ही ईश्वर का साक्षात्कार सम्भव है वा होता है। समाधि में ईश्वर  साक्षात्कार से विवेक उत्पन्न होता है और यही मनुष्यों के जीवन से दुःखों की पूर्णतः निवृति कराकर ईश्वर के सान्निध्य में पहुंचाता है। इसके बाद मनुष्य जब तक जीवित रहता है जीवनमुक्त कहलाता है और मृत्यु होने के पश्चात अनादि जीवात्मा मोक्ष प्राप्त करता है जो दुःखों से सर्वथा रहित अतिशय सुख की अवस्था होती है। इस मोक्ष अव

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