गाय और गांव

भारतीय नस्ल के गाय की 15 खूबियां, जो उन्हें माता का दर्जा प्रदान करती है

भारतीय नस्ल के गाय की 15 खूबियां, जो उन्हें माता का दर्जा प्रदान करती है

1.  भविष्य पुराण में लिखा गया है कि गोमाता कि पृष्ठदेश में ब्रह्म का गले में विष्णु का, मुख में रुद्र का, मध्य में समस्त देवताओं का और रोमकूपों में महर्षिगण, पूँछ में अन्नत नाग, खूरों में समस्त पर्वत, गौमूत्र में गंगा, गौमय में लक्ष्मी और नेत्रों में सूर्य-चन्द्र का वास  हैं।

गौ सेवा या गौ रक्षा का लोग गलत मतलब निकाल लेते हैँ

गौ सेवा या गौ रक्षा का लोग गलत मतलब निकाल लेते हैँ

गौ सेवा या गौ रक्षा का लोग गलत मतलब निकाल लेते हैँ। इसका मतलब ये नहीँ है कि एक डंडा हाथ मेँ लिया एक कट्टा कमर मेँ फसाया और निकल लिये कसाईयोँ और बूचड़ोँ की खोज मे

चूंकि हिन्दू धर्म की विशेषता है कि वो अपनी विसंगतियोँ को भी खुले दिल से स्वीकारता है

हमारे साथ यही दिक्कत है कि नागपंचमी पर नाग को दूध पिलायेँगेँ और साल के बाकी दिन जहाँ कहीँ साँप नजर आया फौरन उसे

मार देँगेँ

गौअष्टमी के दिन गाय को ढ़ूंढ कर चारा खिलायेँगेँ और साल के बाकी दिन बैल के घर के पास नजर आते ही डंडा मार के भगायेँगे

भारतीय अर्थव्यवस्था की आत्मा गाय

हमारा खेतिहर देश जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर खड़ा है, जिसकी आत्मा गाय है। संसार के अन्य देशों के लोग दूध के लिये गाय और खेती के लिये घोड़े या मशीन रखते हैं। वहां के किसानों का काम भिन्न भिन्न पशुओं से चलता है पर हमारे पूर्वजों ने एक ही गाय से दोनों काम किए, गाय से दूध और गोपुत्र बैल से हल चलाना। गांव नगरों में भार—बोझ ढोने, कुएँ—रहट तथा तेलघानी चलाने आदि का काम भी बैलों से लिया जाता है। आज भी ७०% खेती का आधार बैल ही है। हमारे जीवन की आवश्यक खाद्यान्न वस्तुएँ खेती से ही प्राप्त होती हैं और इस हेतु गोवंश हमारे कृषि जीवन का बहुत बड़ा आधार है। वस्तु का मूल्यांकन आर्थिक दृष्टि से होता है। विश्ववि

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