पंचगव्य

फिनाइल की जगह करें ‘गौनाइल’ का इस्तेमाल: मेनका गांधी

फिनाइल की जगह करें ‘गौनाइल’ का इस्तेमाल: मेनका गांधी
  • केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने फर्श की सफाई के लिए गौमूत्र से बने द्रव्य ‘गौनाइल’ के सरकारी दफ्तरों में इस्तेमाल की वकालत करते हुए कहा है कि अभी उपयोग में लाए जा रहे फिनाइल ‘‘रासायनिक तौर पर पर्यावरण के लिए नुकसानदेह’’ हैं। अपने कैबिनेट सहकर्मियों को लिखे पत्र में मेनका ने उनसे अनुरोध किया है कि वे गौमूत्र से बने ‘‘गोनाइल’’ का इस्तेमाल शुरू करें क्योंकि यह ‘‘पर्यावरण के लिहाज से अच्छा’’ है।
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बजारू दूध से बढ़ती बीमारियाँ

बजारू दूध

राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के पशु शरीर क्रिया विज्ञान के वैज्ञानिकों के अनुसार आजकल पशुपालक दूध निकालने की प्रक्रिया में आक्सीटोसीनहार्मौन्स इंजेक्शन का बहुतायत से प्रयोग कर रहे हैं ।। यह इंजेक्शन सस्ता और लगाने में आसान होता है, इसके लगाने से पशु 20 प्रतिशत तक अधिक दूध देता है ।। अतः आजकल इसका अंधाधुंध उपयोग हो रहा है परन्तु इससे स्वास्थ्य भी तेजी से बिगड़ते जा रहा है ।। 

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अत्यंत गुणकारी सिद्ध होती है।

अत्यंत गुणकारी सिद्ध होती है।

गाय ही एकमात्र ऐसा प्राणी है, जिसका मल-मूत्र न केवल गुणकारी, बल्कि पवित्र भी माना गया हैं।

गोबर में लक्ष्मी का वास होने से इसे 'गोवर' अर्थात गौ का वरदान कहा जाना ज़्यादा उचित होगा।

गोबर से लीपे जाने पर ही भूमि यज्ञ के लिए उपयुक्त होती है।

गोबर से बने उपलों का यज्ञशाला और रसोई घर, दोनों जगह प्रयोग होता है।

गोबर के उपलों से बनी राख खेती के लिए अत्यंत गुणकारी सिद्ध होती है।

गोबर की खाद से फ़सल अच्छी होती है और सब्जी, फल, अनाज के प्राकृतिक तत्वों का संरक्षण भी होता है।

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चिकित्सा में पंचगव्य क्यों महत्वपूर्ण है?

चिकित्सा में पंचगव्य क्यों महत्वपूर्ण है?

चिकित्सा में पंचगव्य क्यों महत्वपूर्ण है?
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गाय के दूध, घृत, दधी, गोमूत्र और गोबर
के रस को मिलाकर पंचगव्य तैयार
होता है। पंचगव्य के प्रत्येक घटक द्रव्य
महत्वपूर्ण गुणों से संपन्न हैं।
इनमें गाय के दूध के समान पौष्टिक और
संतुलित आहार कोई नहीं है। इसे अमृत
माना जाता है। यह विपाक में मधुर,
शीतल, वातपित्त शामक, रक्तविकार
नाशक और सेवन हेतु सर्वथा उपयुक्त है।
गाय का दही भी समान रूप से जीवनीय
गुणों से भरपूर है। गाय के दही से
बना छाछ पचने में आसान और पित्त

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