पंचगव्य

गाय के घी का रोग पर उपयोग-

गाय के घी का रोग पर उपयोग-

1.    गाय के घी से बल और वीर्य बढ़ता है और शारीरिक व मानसिक ताकत में भी इजाफा होता है-
2.    गाय का घी नाक में डालने से कोमा से बहार निकल कर चेतना वापस लोट आती है-गाय का घी नाक में डालने से पागलपन दूर होता है गाय का घी नाक में डालने से एलर्जी खत्म हो जाती है-
3.    आयुर्वेद विशेषज्ञो के अनुसार अनिद्रा का रोगी शाम को दोनों नथुनो में गाय के घी की दो-दो बूंद डाले और रात को नाभि और पैर के तलुओ में गौघृत लगाकर लेट जाय तो उसे प्रगाढ़ निद्रा आ जायेगी-

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गौमूत्र के लाभ 

गौमूत्र के लाभ 
  • कब्ज को दूर करता है – गोमूत्र को साफ कपडे में छान कर पीने से कब्ज जैसी बीमारियों को दूर किया जा सकता है |
  • खुजली – यदि आप खुजली जैसी बीमारियों से परेसान है तो गोमूत्र से मालिश यह फिर गोमूत्र से स्नान करे ऐसा करने से आप के शरीर से खुजली की परेशानी दूर हो जाएगी|
  • दाद – धतूरे के पत्ती को पिस कर इसे गोमूत्र में गाढ़ा होने तक उबल ले | अब इसे ठंडे होने के बाद दादा में लग कर कुछ देर सूखने के बाद साफ पानी से धो ले | इस प्रक्रिया को हफ्ते में दो बार करने सेदाद से जल्द छुटकारा मिलता है |
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आयुर्वेद में गाय के घी को अमृत समान बताया गया है

आयुर्वेद में गाय के घी को अमृत समान बताया गया है

आयुर्वेद में गाय के घी को अमृत समान बताया गया है। हमारे घरों में बहुत से ऐसे लोग हैं जो  वीक्यूजेक्यूएन को नियक़्न्तृत रखने के प्रति सतर्कता  बरतते हैं और  घी को हाथ तक नहीं लगाते। पर अगर गाय के घी को नियमित रूप से अपने भोजन में शामिल किया जाए तो इससे वजन भी नियंत्रित रहता है और किसी भी प्रकार की बीमारी भी नहीं लगती। देशी घी का मतलब है गाय के दूध से बना शुद्ध घी, जो कि एक प्रकार की दवा भी माना जाता है। 

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देशी गाय और गव्यों का महत्व ..

आज हम कितने गर्त में गिर चुके है जो गाय को देशी कहकर संबोधित करना पड़ता है और भगवान कृष्ण के वंशजों को देशी गाय की पहचान बतानी पड़ती है। जिस प्रकार हर पीली वस्तु सोना नहींहोती उसी प्रकार हर चार पैर, चार थन वाला जीव गाय नहीं होता । हम दूध के इतने लालची हो गए है कि विदेशी सूअर (जर्सी ,होल्सटीन,फ्रीजियन ) को भी गाय कहने और मानने लगे है गाय तो देशी ही होती है। गाय की पीठ पर विद्यमान सूर्यके्तु नाडी सौर मंडल की समस्त ऊर्जा को अवशोषित कर अपने गव्यों (दूध ,मूत्र,गौमय) में डालकर समस्त मानव जीवन और प्रकृति को निरोगी एवं सम रखने का कार्य करती हैं। हमारा शरीर पंचमहाभूतों से बना हैं ये प

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