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भारतीय कृषि एवं गाय

भारतीय कृषि एवं गाय

हम अपनी अर्थव्यवस्था पर नजर डालें तो मन में एक प्रश्न उठता है कि भारतीय कृषि की प्रगति में कौन से बाधक तत्व हैं?

खेती में गाय और केंचुए को लेकर चल रही है खींचतान

कपड़े का मशहूर ब्रांड गैप समाज और कारोबार में बढ़त पाने की खातिर गोबर पर आधारित प्राकृतिक खेती का समर्थन कर रहा है। यही वजह है कि भारत में गायों की संख्या कम होने से गैप चिंतित है।

इस ब्रांड का ऑर्गेनिक फार्मिंग यानी जैविक खेती के समर्थकों से वैचारिक टकराव चल रहा है। कंपनी का मानना है कि अगर उसे अपने ब्रांड के लिए समाज में एक निश्चित मुकाम दिलानी है तो इसका सबसे बढ़िया तरीका है कि प्राकृतिक खेती का समर्थन किया जाए। इस तरह की खेती के लिए गाय का गोबर और गोमूत्र बहुत ही जरूरी तत्त्व हैं।

गौरक्षा के लिए 250 किमी की पैदल यात्रा, अब करेंगे अनशन

गौरक्षा के लिए 250 किमी की पैदल यात्रा, अब करेंगे अनशन

बुंदेलखंड में भूख से दम तोड़ रही लाखों गाय को बचाने के लिए इस भीषण गर्मी के मौसम में सरकार ने अब तक किसी तरह की कोई पहल नहीं की है। सरकार तक गौवंश की इस दुर्दशा की तस्वीर पहुंचाने के मकसद से बुंदेलखंड के सामाजिक कार्यकर्ता तारा पाटकर दस दिनों की पैदल यात्रा कर लखनऊ पहुंचे। पाटकर ने महोबा से 5 जून को गौरक्षा पदयात्रा शुरू की थी और 15 जून को लखनऊ पहुंचे। यहाँ उन्होंने ऐलान किया कि 16 जून से एक सप्ताह की भूख हड़ताल शुरू करेंगे। 

कैसे गौशाला से कमाए 3.5 करोड़ रुपये वो भी बिना गाय से दूध लिए?

गौशाला से कमाए

भारत : बिहार चुनाव ही ले लीजिए! गाय छाई रहीं। नेताओं ने भाषणों में धर्म ग्रंथों से उठाए गोधन, कामधेनु, गोवर्धन, गोरक्षा, जननी जैसे शब्द बोल-बोलकर गायों को बूचड़खानों में जाने से रोकने के संकल्प लिए। कैसे रोकेंगे? ये कोई नहीं बता पाया।

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