गौभक्त विचार

धेनु: सदनम् रचीयाम्

धेनु: सदनम् रचीयाम्

आज यत्र—तत्र—सर्वत्र शाकाहार की चर्चा है किन्तु धर्मप्राण देश भारत, जहां की संस्कृति में गाय को माता तुल्य आदर प्राप्त है, वहां मांसाहार तथा मांसनिर्यात हेतु गो हत्या अत्यन्त शर्मनाक है। अहिल्या माता गोशाला जीव दया मण्डल ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस निबन्ध प्रतियोगिता में सम्पूर्ण देश से ५६ प्रविष्टियाँ प्राप्त हुर्इं थीं। निर्णायक मण्डल ने कु. पटेल के आलेख को प्रथम घोषित किया। जनरुचि का विषय होने तथा शाकाहार के प्रचार में महत्वपूर्ण होने की दृष्टि से अर्हत् वचन के पाठकों के लिये यह आलेख प्रस्तुत है।

धेनु: सदनम् रचीयाम्’’ (अर्थववेद—११.१.३४)

कब होगी गोचर भूमि खाली

मोदी में अगर दम है तो 3 करोड़ 32 लाख 50 हजार एकड़ ज़मीन है गोचर भूमि की बस इसको खाली कर दो।बिना गोचर भूमि के गौमाता की रक्षा नही हो सकती । गौमाता चारे के अभाव में भूखी मर है गौशाला के अन्दर सडको पर पालीथीन खा रही है और सरकार 500 करोड़ देकर चमत्कार कर रही है। गौमता को तुम्हारा अहसान नही चाहिए मोदी जी बस कत्लखाना बंद कर दो और गोचर भूमि खाली कर दो। गौहत्या करने वालो को मौत की सजा दे दो। विदेशी नस्ल को भारत में बंद कर दो। 5लाख करोड़ कारोबार है गौमांश चमडा और अन्य चीजो से। अगर सरकार 500 करोड़ दे रही है तो कोई एहसान नही कर रही है गौरक्षा आन्दोलन को कमजोर कर रही है। ये वैसे ही बात है जैसे सरकार शराब बेच

जानिये क्यों पास नहीं हुआ आज तक गौहत्या रोकने का कोई बिल ??

माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय मोदी जी से निवेदन है कि अब वे अपनी गौमाता की रक्षा और सेवा के लिए शीघ्राति शीघ्र उपरोक्त बातों को संज्ञान में लेते हुए निश्चय ही ठोस कदम उठायेंगे। अब आपको तय करना है की  गौ ह्त्या रोकने का बिल संसद मे कैसे पास करवाएँगे ??

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