Skahore's blog

किसानो की भूल गौमाता को बेचना परिणाम गौहत्या

क्या बिना किसी कारण ही ओले किसानों की फसलों को यूँ ही मुफ्त में बर्बाद कर रहे हैं? यदि ऐसा हो रहा है तो वे भगवान पर आरोप लगाकर प्रकृति को चुनौती दे सकते हैं। बिना किसी वजह के कुछ नहीं होता है। हर चीज के पीछे एक कारण होता है, एक मकसद होता है। चाहे हम समझ पाएँ या नहीं समझे। क्या जानकर या फिर अंजाने में किसानों से भी कोई गलती हो सकती हैं ? प्राचीनकाल में किसान सबसे सुखी और खुशहाल हुआ करता था। लोग खेती को सबसे उत्तम व्यवसाय मानते थे। परंतु आधुनिक समय में लोग खेती करने वाले को पीछड़ा हुआ इंसान समझते हैं। यहाँ तक की सरकारें भी किसानों का शोषण करती हैं, आखिर क्यों?

गो गव्य ही सर्वोत्तम आहार हैं।

यज्ञ में काम लिया जाने वाला घृत केवल और केवल गो-घृत ही होना चाहिये, तभी देवता उसको ग्रहण करेंगे। बाजारू घृत जो कि चर्बीयुक्त हो सकता है या फिर अन्य पशुओं का घृत जो कि अशुद्ध माना जाता है, देवता नहीं दानव ग्रहण करेंगे। उससे देव शक्ति की बजाय दानवी शक्ति का पोषण होगा। परिणाम हमारे लिये निश्चित उल्टा ही होगा। अतः यज्ञ में केवल गो-गव्यों का ही प्रयोग करना चाहिये। शास्त्र विरुद्ध किया गया कार्य पूरी सृष्टि के लिये हानिकारक होता है। शास्त्र में जहाँ भी दूध, दही, छाछ, मक्खन, घृत आदि उल्लेख किया गया है वो केवल गाय के गव्य ही हैं, क्योंकि उस समय भैंस, जर्सी, हॉलिस्टीयन जैसे पशुओं का व्यवहार कहीं भी

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दूध विज्ञान A1 MILK AND A2 MILK

गो गव्य ही सर्वोत्तम आहार हैं। यज्ञ में काम लिया जाने वाला घृत केवल और केवल गो-घृत ही होना चाहिये, तभी देवता उसको ग्रहण करेंगे। बाजारू घृत जो कि चर्बीयुक्त हो सकता है या फिर अन्य पशुओं का घृत जो कि अशुद्ध माना जाता है, देवता नहीं दानव ग्रहण करेंगे। उससे देव शक्ति की बजाय दानवी शक्ति का पोषण होगा। परिणाम हमारे लिये निश्चित उल्टा ही होगा। अतः यज्ञ में केवल गो-गव्यों का ही प्रयोग करना चाहिये। शास्त्र विरुद्ध किया गया कार्य पूरी सृष्टि के लिये हानिकारक होता है। शास्त्र में जहाँ भी दूध, दही, छाछ, मक्खन, घृत आदि उल्लेख किया गया है वो केवल गाय के गव्य ही हैं, क्योंकि उस समय भैंस, जर्सी, हॉलिस्टीयन

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